नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026। पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट न्यायाधीश एवं बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़े रहे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कथित नकदी बरामदगी मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित संसदीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सदन में पेश कर दी है और रिपोर्ट के अनुसार उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोप साबित पाए गए हैं।
सरकारी आवास में मिली थी बड़ी मात्रा में नकदी
मामला मार्च 2025 में दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगने के बाद सामने आया था। आग बुझाने पहुंचे कर्मियों को वहां बड़ी संख्या में जले और अधजले ₹500 के नोट मिले थे। बाद में इस मामले ने न्यायपालिका की जवाबदेही और न्यायिक आचरण को लेकर देशव्यापी बहस छेड़ दी।
जांच समिति ने तीनों आरोप माने साबित
लोकसभा की जांच समिति के अनुसार, जस्टिस वर्मा नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और उसके स्वामित्व से संबंधित सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। समिति ने कथित रूप से यह भी माना कि मामले से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में गंभीर कमियां रहीं और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ के पहलू सामने आए।
जस्टिस वर्मा ने आरोपों से किया था इनकार
जस्टिस वर्मा ने पहले आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि वह घटना के समय दिल्ली में मौजूद नहीं थे और स्टोररूम में रखी नकदी से उनका कोई संबंध नहीं था। उन्होंने नकदी को अपने या अपने परिवार द्वारा रखे जाने की बात भी नकारी थी।
जांच समिति की रिपोर्ट में आरोप साबित होने के बाद मामला न्यायाधीश को हटाने की संसदीय प्रक्रिया के अगले चरण से जुड़ता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जांच समिति द्वारा आरोप साबित पाया जाना और संसद द्वारा अंतिम रूप से न्यायाधीश को पद से हटाया जाना अलग-अलग संवैधानिक चरण हैं। इसलिए रिपोर्ट को अंतिम संसदीय हटाने का निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
इस प्रकरण ने एक बार फिर न्यायपालिका में पारदर्शिता, न्यायिक आचरण और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायपालिका जैसे संवैधानिक संस्थान में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसी जांच और उसके निष्कर्षों की प्रक्रिया का पारदर्शी होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




