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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: अवैध डिजिटल कंटेंट से नागरिकों की सुरक्षा के लिए बने प्रभावी तंत्र

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: अवैध डिजिटल कंटेंट से नागरिकों की सुरक्षा के लिए बने प्रभावी तंत्र

नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026। सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट पर प्रसारित होने वाली गंभीर और अवैध डिजिटल सामग्री से नागरिकों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने केंद्र के गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से ऐसा त्वरित और न्यायिक निगरानी वाला तंत्र तैयार करने को कहा है, जिसके माध्यम से गंभीर गैरकानूनी डिजिटल कंटेंट पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

URL-विशिष्ट आपात व्यवस्था पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से URL-specific emergency mechanism की आवश्यकता बताई है। इसका उद्देश्य किसी विशिष्ट अवैध ऑनलाइन सामग्री या URL के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करना है, ताकि इंटरनेट पर मौजूद गैरकानूनी सामग्री से आम नागरिकों को होने वाले नुकसान को सीमित किया जा सके। प्रस्तावित व्यवस्था में न्यायिक निगरानी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

डिजिटल दुनिया में नागरिकों की सुरक्षा जरूरी

इंटरनेट और सोशल मीडिया के तेजी से विस्तार के साथ फर्जी, आपत्तिजनक, शोषणकारी और अन्य गैरकानूनी सामग्री का प्रसार भी गंभीर चिंता का विषय बना है। केंद्र सरकार पहले भी कह चुकी है कि IT Act और Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी और हानिकारक सामग्री से निपटने के लिए व्यवस्था मौजूद है।

अधिकारों और डिजिटल सुरक्षा के बीच संतुलन

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अवैध सामग्री के खिलाफ कार्रवाई कानून और न्यायिक निगरानी के दायरे में हो। इंटरनेट पर नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अन्य संवैधानिक अधिकारों की रक्षा भी जरूरी है।

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा भी प्रमुख चिंता

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ आपत्तिजनक या शोषणकारी सामग्री को लेकर न्यायपालिका पहले भी गंभीर रुख अपना चुकी है। सरकार ने भी डिजिटल स्पेस को महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने तथा गैरकानूनी सामग्री पर कार्रवाई की प्रतिबद्धता जताई है।

डिजिटल युग में जवाबदेही का संदेश

सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश से यह संदेश स्पष्ट है कि डिजिटल स्वतंत्रता के साथ डिजिटल जवाबदेही भी आवश्यक है। अवैध सामग्री के खिलाफ कार्रवाई तेज हो, लेकिन वह पारदर्शी, कानूनसम्मत और न्यायिक निगरानी में हो—यही इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है।

SSN विशेष | नई दिल्ली

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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