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यूपी विधानसभा का मानसून सत्र हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार (5 अगस्त 2026) को विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र मूल रूप से 6 अगस्त तक चलना था, लेकिन राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के कारण कार्यवाही समय से पहले समाप्त कर दी गई।

सदन में क्या हुआ? विधानसभा के तीसरे दिन शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने राम मंदिर के कथित चढ़ावा गबन मामले पर चर्चा की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष ने सदन में हंगामा किया और कार्यवाही बाधित की। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कई बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा।

अध्यक्ष महाना भावुक भी हो गए और कहा कि उन्हें इस बात पर विचार करना पड़ सकता है कि वे इस कुर्सी के योग्य हैं या नहीं। उन्होंने विपक्ष के आचरण पर नाराजगी जताई।

अनुपूरक बजट और बिल पास मंगलवार को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 59,019 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट सदन में पेश किया था। बुधवार को इस पर चर्चा होनी थी, लेकिन हंगामे के कारण चर्चा नहीं हो सकी। इसके बावजूद सरकार ने हंगामे के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा के पारित करा लिए।

इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया।

मुख्यमंत्री का हमला सत्र स्थगित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का रवैया नकारात्मक और अलोकतांत्रिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सदन चलने नहीं देना चाहता था।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी सपा पर निशाना साधा और कहा कि बाबरी और बाबर के समर्थकों को राम मंदिर पर बोलने का अधिकार नहीं है।

 मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू हुआ था। पहले दो दिनों में भी राम मंदिर मुद्दे, शिक्षक भर्ती और अन्य मामलों को लेकर हंगामा हुआ था। विपक्ष ने प्रदर्शन भी किए। कुल मिलाकर सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया और महत्वपूर्ण चर्चाएं अधूरी रह गईं।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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