बांग्लादेश की सत्ताच्युत प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिसंबर महीने में देश लौटने की घोषणा की है। 2024 के अगस्त में छात्र-जन आंदोलन के कारण सत्ता छोड़कर भारत में शरण लेने के लगभग दो साल बाद उन्होंने यह फैसला सुनाया है। मौत की सजा और गिरफ्तारी के खतरे के बावजूद वे देश लौटकर अदालत में आत्मसमर्पण करना चाहती हैं।
हसीना की घोषणा
जुलाई 2026 में रॉयटर्स को दिए गए इंटरव्यू में शेख हसीना ने पहली बार साफ समयसीमा बताई। उन्होंने कहा कि वे और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता दिसंबर के आसपास भारत से लौटकर अदालत में खुद को सरेंडर कर देंगे।
5 अगस्त 2026 को (सत्ताच्युति के ठीक दो साल बाद) नई दिल्ली में साउथ एशिया फॉरेन करेस्पॉन्डेंट्स क्लब में वर्चुअल भाषण देते हुए उन्होंने फिर से यही बात दोहराई। उन्होंने कहा—
“वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, जेल भेज सकते हैं, यहां तक कि मार भी सकते हैं। लेकिन डर मेरे कर्तव्य का फैसला नहीं कर सकता। मैं देश लौटूंगी। दिसंबर मेरा लक्ष्य है।”
हसीना ने कहा कि उनकी वापसी सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि देश के लोगों के साथ खड़े होने, लोकतंत्र, विकास और धर्मनिरपेक्षता बहाल करने के लिए है। उन्होंने अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाने की भी मांग की।
पृष्ठभूमि
2024 के जुलाई-अगस्त में छात्र आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में करीब 1,400 लोग मारे गए थे। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह आंकड़ा दिया गया है। इस घटना को लेकर मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई है। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों में भी सजा हुई है। अवामी लीग की गतिविधियां प्रतिबंधित कर दी गई हैं।
वर्तमान में बांग्लादेश में बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार है। ढाका बार-बार भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
क्या अटकलें चल रही हैं?
हसीना की घोषणा को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हो रही है—
- राजनीतिक रणनीति: कई लोग मानते हैं कि यह पार्टी को फिर से सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने की रणनीति है। दिसंबर को ‘विजय का महीना’ बताकर वे कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा करना चाहती हैं।
- वास्तविक संभावना: मौत की सजा होने के कारण उनकी सुरक्षित वापसी मुश्किल लगती है। कुछ विश्लेषक इसे प्रतीकात्मक घोषणा मान रहे हैं। अगर वे लौटती हैं तो गिरफ्तारी और मुकदमा तय माना जा रहा है।
- भारत की स्थिति: भारत ने अभी तक हसीना को प्रत्यर्पित नहीं किया है। उनकी वापसी की घोषणा से दिल्ली पर कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है।
- बांग्लादेश की प्रतिक्रिया: बीएनपी और अन्य दल उनकी वापसी को राजनीतिक अस्थिरता बढ़ाने की कोशिश बता रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि लौटने पर मौत की सजा लागू करने का मौका मिलेगा।
संभावित प्रभाव
हसीना की वापसी बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। अवामी लीग के फिर से सक्रिय होने से बीएनपी-जामात के साथ नया टकराव शुरू हो सकता है। भारत-बांग्लादेश संबंध भी प्रभावित हो सकते हैं।
अभी तक कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। हसीना ने कहा है—“जब समय सही होगा, तब बताऊंगी।”
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



