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संसदीय समिति ने मार्क जुकरबर्ग से पीएम मोदी के वीडियो हटाने पर माफी की मांग की

संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को अस्थायी रूप से हटाने के मामले में व्यक्तिगत और बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि अगर तीन दिनों के अंदर माफी नहीं आई तो मेटा को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा वापस ली जा सकती है।

क्या हुआ था?

23 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर अपना पहला सेल्फी स्टाइल वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने छात्रों और युवाओं (जेन-जी) को संबोधित करते हुए परीक्षा पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर सरकार की कार्रवाई के बारे में बात की। वीडियो को बाद में फेसबुक पर भी शेयर किया गया।

28 जुलाई को यह वीडियो फेसबुक पर करीब पांच घंटे (रात 12:30 बजे से सुबह 5 बजे तक) के लिए उपलब्ध नहीं रहा। मेटा ने इसे तकनीकी गड़बड़ी या एआई-आधारित ऑटोमेटेड कंटेंट फिल्टर की गलती बताया और माफी मांगी। कंपनी का कहना था कि वीडियो गलती से हटा दिया गया था और बाद में बहाल कर दिया गया।

हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा के स्पष्टीकरण को “अपर्याप्त” और “तर्कसंगत नहीं” करार दिया।

संसदीय समिति का रुख

समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मेटा के प्रतिनिधियों से तीन घंटे से अधिक चली बैठक के बाद कहा कि मेटा ने खुद माना है कि प्रधानमंत्री का वीडियो पांच घंटे तक गायब रहा। उन्होंने इसे बहुत गंभीर मामला बताया।

समिति ने दो बातें साफ कीं:

  • माफी मार्क जुकरबर्ग की तरफ से व्यक्तिगत रूप से आनी चाहिए।
  • अगर जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते तो धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ले ली जानी चाहिए।

समिति ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” करार दिया और कहा कि प्रधानमंत्री 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मेटा को 10 दिनों के अंदर लिखित जवाब भी मांगा गया है। बाद में समिति ने मंत्रालयों को पत्र लिखकर तीन दिनों का अल्टीमेटम दोहराया।

सेफ हार्बर क्या है?

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (इंटरमीडियरी) तीसरे पक्ष की सामग्री के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं होते, बशर्ते वे कुछ शर्तों का पालन करें। अगर यह सुरक्षा हटा दी जाती है तो प्लेटफॉर्म और उसके अधिकारियों को सीधे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

मेटा की प्रतिक्रिया और ताजा विकास

मेटा ने पहले तकनीकी गलती बताते हुए माफी दी थी। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेटा के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल काप्लान समेत कंपनी के अधिकारियों ने सरकार के साथ बैठक की। कुछ सरकारी सूत्रों के मुताबिक मार्क जुकरबर्ग ने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक और संचालन संबंधी गलतियों के लिए माफी मांगी है। कुछ रिपोर्ट्स में पीएम मोदी के वीडियो वाले मामले को भी इसमें शामिल बताया गया है, जबकि कुछ जगहों पर यह स्पष्ट नहीं है कि जुकरबर्ग ने व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे पर माफी मांगी है या नहीं।

यह मामला भारत में बिग टेक कंपनियों की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और देश के कानूनों के पालन को लेकर चल रही चर्चा का हिस्सा है। समिति और सरकार दोनों ने मेटा से सख्त जवाबदेही की मांग की है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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