उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी शोक समाचार सामने आई है। बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक और वर्तमान विधानसभा में पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार, 5 अगस्त 2026 को दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। उनकी उम्र 55 वर्ष थी।
निधन कैसे हुआ?
उमाशंकर सिंह पिछले कई वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार वे कैंसर (चौथे स्टेज) से पीड़ित थे। उन्होंने अमेरिका में भी इलाज और सर्जरी करवाई थी। हाल के दिनों में दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार शाम उनके निधन की खबर मिलते ही रसड़ा, बलिया और पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई।
उनके परिजनों, समर्थकों और शुभचिंतकों में गहरा दुख है। उन्होंने अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ दिया है।
राजनीतिक सफर
उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले की रसड़ा तहसील के खनवर गांव में हुआ था। वे किसान परिवार से थे। छात्र राजनीति से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ। उन्होंने सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया में छात्र संघ चुनाव लड़ा और बड़ी मार्जिन से जीत हासिल की।
2011 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी जॉइन की। इसके बाद 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार रसड़ा से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के एकमात्र विधायक के रूप में वे विधानसभा पहुंचे और पार्टी के नेता के रूप में भी काम किया।
वे क्षेत्र में जनसेवा और सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते थे। सामूहिक विवाह कराने जैसे कामों से उन्होंने स्थानीय स्तर पर अच्छी पहचान बनाई थी। लोग उन्हें गरीबों का मसीहा भी कहते थे।
मायावती से विशेष संबंध
बसपा प्रमुख मायावती उमाशंकर सिंह को छोटा भाई मानती थीं। पिछले वर्ष रक्षाबंधन पर मायावती ने उन्हें राखी बांधी थी। यह सम्मान परिवार के बाहर सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों को ही मिला है। मायावती ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें कर्मठ, ईमानदार तथा पूरी तरह वफादार नेता बताया।
शोक संदेश
उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने शोक संदेश में कहा कि उमाशंकर सिंह का निधन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारी के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस और मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय दिया। उन्होंने जनसेवा और क्षेत्र के विकास को हमेशा प्राथमिकता दी।
कई अन्य नेताओं ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की है। बलिया और रसड़ा क्षेत्र में उनके समर्थकों के बीच शोक का माहौल है।
उमाशंकर सिंह के निधन के साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। वे 18वीं विधानसभा में पार्टी के एकमात्र विधायक थे।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



