भदोही का नाम फिर ‘संत रविदास नगर’ किए जाने का मायावती ने किया स्वागत
कहा—दलित महापुरुषों के सम्मान से जुड़ी पहचान बहाल होना सकारात्मक कदम
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भदोही जिले का नाम बदलकर पुनः “संत रविदास नगर” किए जाने के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इस फैसले को संत रविदास की विरासत, सामाजिक सम्मान और दलित समाज की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया।
मायावती ने कहा कि संत रविदास केवल एक महान संत और समाज सुधारक ही नहीं, बल्कि समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय के प्रेरणास्रोत भी हैं। उनके नाम पर जिले की पहचान बहाल किया जाना समाज के उस बड़े वर्ग की भावनाओं का सम्मान है, जो संत रविदास के विचारों और संदेशों से जुड़ा हुआ है।
बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस निर्णय के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दलित और पिछड़े वर्गों के महापुरुषों के नाम पर रखे गए जिलों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों की पहचान को सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूर्व में बदले गए अन्य जिलों के नामों पर भी सरकार पुनर्विचार करे और महान सामाजिक व्यक्तित्वों के नाम से जुड़ी पुरानी पहचान को बहाल किया जाए।
भदोही जिले के नाम का राजनीतिक और सामाजिक इतिहास भी काफी चर्चा में रहा है। मायावती के मुख्यमंत्री कार्यकाल में जिले का नाम संत रविदास नगर रखा गया था। बाद में नाम बदलकर फिर भदोही कर दिया गया। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर जिले की पहचान को पुनः संत रविदास नगर के रूप में स्थापित करने का निर्णय लिया है।
मायावती ने कहा कि महापुरुषों के नाम केवल राजनीतिक पहचान का विषय नहीं हैं, बल्कि वे समाज के संघर्ष, योगदान और सामाजिक परिवर्तन की विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। संत रविदास ने अपने विचारों के माध्यम से जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के विरुद्ध आवाज उठाई तथा मानव समानता का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि सरकारों को महापुरुषों के सम्मान के साथ-साथ उनके विचारों को व्यवहार में लागू करने पर भी ध्यान देना चाहिए। दलितों, वंचितों और कमजोर वर्गों को शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराना ही सामाजिक न्याय की वास्तविक दिशा होगी।
भदोही का नाम पुनः संत रविदास नगर किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित महापुरुषों की विरासत और जिलों की ऐतिहासिक पहचान का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मायावती के स्वागत के बाद इस निर्णय को सामाजिक प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक सम्मान के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मायावती ने कहा कि संत रविदास के नाम से जिले की पहचान बहाल होना स्वागतयोग्य कदम है और अन्य महापुरुषों के नाम पर स्थापित जिलों की पुरानी पहचान को भी सम्मान मिलना चाहिए।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



