लखनऊ: राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम) के अंतर्गत आज लखनऊ कलेक्ट्रेट कार्यालय में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर जिले में टीबी मुक्त अभियान को और तेज करने के लिए नई रणनीतियों और जागरूकता गतिविधियों का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य बातें कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत लखनऊ जिला पहले ही उल्लेखनीय प्रदर्शन कर चुका है। यहां टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) कवरेज 99 प्रतिशत से अधिक रहा है और स्क्रीनिंग अभियानों में भी जिले ने अच्छा रिकॉर्ड बनाया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि टीबी केवल इलाज से नहीं, बल्कि जागरूकता, समय पर जांच और समुदाय की भागीदारी से खत्म की जा सकती है। उन्होंने घर-घर स्क्रीनिंग, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष शिविर और पोषण सहायता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार के 100 दिवसीय सघन अभियान के बाद अब नियमित निगरानी और फॉलो-अप को मजबूत किया जाएगा। टीबी के लक्षणों की पहचान, मुफ्त जांच और पूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के लिए फील्ड टीमों को नए निर्देश दिए गए।
लखनऊ की उपलब्धि हाल के आंकड़ों के अनुसार लखनऊ ने टीबी मुक्त भारत अभियान में प्रदेश के शीर्ष जिलों में स्थान बनाया है। एक्स-रे जांच, आणविक परीक्षण (एनएएटी) और संपर्क व्यक्तियों को प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट देने में जिले ने उच्च अंक हासिल किए हैं।
अधिकारियों ने कहा कि लक्ष्य 2027 तक ग्राम पंचायत को टीबी मुक्त बनाना है और इसके लिए लखनऊ जैसे जिलों को अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने सभी नागरिकों से अपील की कि टीबी के लक्षण (लगातार खांसी, बुखार, वजन घटना आदि) दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। मुफ्त इलाज और पोषण सहायता उपलब्ध है।
टीबी हारेगा, देश जीतेगा यह कार्यक्रम राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की निरंतरता को दर्शाता है, जिसमें प्रशासन, स्वास्थ्य कर्मी और समुदाय मिलकर काम कर रहे हैं।
टीबी मुक्त ग्राम पंचायत लखनऊ: सभी ब्लॉकों में सफलता, 65 पंचायतें घोषित
लखनऊ: राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम और टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत लखनऊ जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिले के विभिन्न ब्लॉकों में कुल 65 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर इन पंचायतों के प्रधानों को सम्मानित भी किया गया।
ब्लॉकवार उपलब्धियां
लखनऊ के प्रमुख विकास खंडों में टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों की संख्या इस प्रकार है:
- बख्शी का तालाब ब्लॉक: सबसे आगे। डिगोई ग्राम पंचायत को स्वर्ण स्मृति चिन्ह मिला। इसके अलावा बाहरगांव, कौड़ियामऊ, हरधौरपुर, कपासी, मिसिरपुर, मोहम्मदपुर गढ़ी, पालपुर, पारा, सीवां, सुभान नगर अरिगवां, रजौली, राजपुर सलेमपुर सहित कई पंचायतों को रजत और कांस्य श्रेणी में सम्मानित किया गया।
- सरोजनीनगर ब्लॉक: पहाड़पुर, तेरवा, बेंती, परवर पूरब सहित कई पंचायतें टीबी मुक्त।
- काकोरी ब्लॉक: जगतपुर सहित अन्य पंचायतें।
- मलिहाबाद ब्लॉक: हतौली और अन्य पंचायतें।
- अन्य ब्लॉक (माल, गोसाईंगंज, चिनहट आदि): कई ग्राम पंचायतों ने टीबी मुक्त का दर्जा हासिल किया।
टीबी मुक्त घोषित होने के मानक किसी ग्राम पंचायत को टीबी मुक्त घोषित करने के लिए सख्त मानदंड तय किए गए हैं:
- लगातार एक, दो या तीन वर्षों तक कोई नया टीबी मरीज न मिलना।
- प्रति 1000 आबादी पर पर्याप्त स्क्रीनिंग और जांच।
- मरीजों का पूर्ण उपचार और संपर्क व्यक्तियों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) उपलब्ध कराना।
जिन पंचायतों में तीन वर्षों से कोई मरीज नहीं मिला उन्हें स्वर्ण, दो वर्षों से नहीं मिला उन्हें रजत और एक वर्ष से नहीं मिला उन्हें कांस्य स्मृति चिन्ह दिया गया।
सफलता के पीछे की वजह मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.बी. सिंह और जिला स्वास्थ्य टीम के अनुसार यह सफलता आशा कार्यकर्ताओं, ग्राम प्रधानों, स्वास्थ्य कर्मियों, निक्षय मित्रों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से संभव हुई है। घर-घर स्क्रीनिंग, जागरूकता अभियान, मुफ्त जांच और पोषण सहायता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लखनऊ जिले ने 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान में भी प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल किया था। टीपीटी कवरेज लगभग 99.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



