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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का ऑस्ट्रेलिया दौरा: रक्षा सहयोग को मजबूती, नए समझौते और इंडो-पैसिफिक में एकजुटता-श्री चाड नायडू, विशेष संवाददाता ऑस्ट्रेलिया द्वारा रिपोर्ट

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का ऑस्ट्रेलिया दौरा: रक्षा सहयोग को मजबूती, नए समझौते और इंडो-पैसिफिक में एकजुटता

कैनबरा/सिडनी, 10 अक्टूबर 2025 – भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 9-10 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचकर द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को नई दिशा दी। यह यात्रा दशक भर में किसी भारतीय रक्षा मंत्री की पहली ऐसी यात्रा है, जो 2020 में स्थापित भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई। श्री सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ द्विपक्षीय रक्षा मंत्रियों संवाद की सह-अध्यक्षता की, जहां कई महत्वपूर्ण समझौते साइन हुए। इस यात्रा ने न केवल सैन्य सहयोग को मजबूत किया, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।

पहला दिन: कैनबरा में द्विपक्षीय संवाद और समझौतों पर हस्ताक्षर

9 अक्टूबर को कैनबरा पहुंचने पर श्री राजनाथ सिंह का स्वाग्य किया गया। ऑस्ट्रेलियाई उप-प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने उन्हें गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच विस्तृत द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में दोनों पक्षों ने प्रधानमंत्रियों की दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए सामूहिक शक्ति को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा में योगदान देने पर चर्चा की। श्री सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री को 2026 में भारत में होने वाले वार्षिक रक्षा मंत्रियों संवाद के लिए निमंत्रण दिया, जिसे मार्ल्स ने स्वीकार कर लिया।

प्रमुख समझौते

इस संवाद के दौरान तीन महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर हुए:

  • सूचना साझा करने का समझौता: दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधी सूचना के आदान-प्रदान को मजबूत करने के लिए।
  • पनडुब्बी खोज एवं बचाव सहयोग पर एमओयू: भारत-ऑस्ट्रेलिया कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर, जो पनडुब्बी आपात स्थितियों में आपसी सहायता सुनिश्चित करेगा। भारत को ऑस्ट्रेलिया के ‘ब्लैक कैरिलन’ पनडुब्बी बचाव अभ्यास में भाग लेने का निमंत्रण भी मिला।
  • संयुक्त स्टाफ वार्ता की शर्तें: सभी डोमेन में संयुक्त अभ्यास, संचालन एवं अंतरसंचालनीयता के लिए एक मंच स्थापित करने के लिए।

इसके अलावा, 2024 में साइन हुए हवाई ईंधन भरने की व्यवस्था को कार्यान्वित करने पर प्रगति हुई। दोनों मंत्रियों ने संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप पर चर्चा की, जिसे प्रधानमंत्रियों द्वारा नवीनीकृत एवं मजबूत करने की उम्मीद है। श्री सिंह ने एक लाइव एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग अभ्यास का अवलोकन भी किया, जो दोनों देशों की बढ़ती अंतरसंचालनीयता का प्रतीक था।

रक्षा सहयोग पर चर्चा

संवाद में रक्षा साझेदारी को सभी डोमेन में विस्तारित करने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने अभ्यासों की संख्या एवं जटिलता बढ़ाने, म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट अरेंजमेंट (एमएलएसए) को लागू करने तथा विनिमय कार्यक्रमों को मजबूत करने पर सहमति जताई। ऑस्ट्रेलियाई रॉयल एयर फोर्स के ‘एक्सरसाइज तारंग शक्ति’ 2024 में भागीदारी तथा 2026 में नौसेना-दर-नौसेना संलग्नताओं का उल्लेख किया गया। क्वाड (भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका) के तहत समुद्री डोमेन जागरूकता में सहयोग बढ़ाने तथा ‘एक्सरसाइज मलाबार’ के दौरान दूसरी संयुक्त गतिविधि आयोजित करने पर सहमति बनी।

श्री सिंह ने आतंकवाद पर भारत का रुख दोहराते हुए कहा, “आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।” उन्होंने क्षेत्रीय शांति के लिए आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

दूसरा दिन: सिडनी में नौसैनिक सुविधा का दौरा एवं उद्योग राउंड टेबल

10 अक्टूबर को सिडनी पहुंचे श्री सिंह ने ऐतिहासिक एवं रणनीतिक नौसैनिक सुविधा एचएमएएस कुट्टाबुल का दौरा किया। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा सहायक मंत्री पीटर खलील के साथ पहुंचे श्री सिंह को सिडनी हार्बर की अत्याधुनिक सुविधाओं पर ब्रिफिंग दी गई। उन्होंने एडमिरल हडसन जहाज पर दौरा किया, जहां दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक में समुद्री डोमेन जागरूकता एवं नौसैनिक सहयोग के लाभों पर चर्चा की। इस दौरे ने भारत एवं ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल को रेखांकित किया।

भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा उद्योग व्यवसाय राउंड टेबल

दोपहर में श्री सिंह ने पीटर खलील के साथ सिडनी में आयोजित प्रथम भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा उद्योग व्यवसाय राउंड टेबल की सह-अध्यक्षता की। यह आयोजन भारत के रक्षा मंत्रालय, ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विभाग, न्यूलैंड ग्लोबल ग्रुप एवं ऑस्ट्रेलिया-भारत बिजनेस काउंसिल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। इसमें भारत के उच्चायोग गोलप बागले, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, राजनयिक एवं उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए।

श्री सिंह ने अपने संबोधन में भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत रणनीतिक, औद्योगिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ते तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने राउंड टेबल को व्यवसाय, उद्योग एवं नवाचार में प्राकृतिक सहयोगियों के रूप में स्थापित करने का घोषणा पत्र बताया। द्विपक्षीय संबंधों के तीन स्तंभों—सरकार-से-सरकार सहयोग, जन-से-जन संपर्क एवं व्यवसायिक हितों का अभिसरण—का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ एवं ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत अवसरों पर चर्चा की।

भारत की अर्थव्यवस्था को विश्व की चौथी सबसे बड़ी एवं सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बताते हुए श्री सिंह ने पिछले वित्तीय वर्ष में रक्षा उत्पादन को 1.51 लाख करोड़ रुपये (18 अरब डॉलर) एवं निर्यात को 23,622 करोड़ रुपये (2.76 अरब डॉलर) पहुंचने का जिक्र किया। उन्होंने प्रोपल्शन तकनीक, स्वायत्त जलयान, उड़ान सिमुलेटर, उन्नत सामग्री एवं जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त विकास के अवसर सुझाए। ऑस्ट्रेलियाई रॉयल नेवी एवं पैसिफिक समुद्री सुरक्षा कार्यक्रम के तहत जहाजों की मरम्मत एवं अपग्रेड के लिए भारतीय शिपयार्डों की क्षमता पर बल दिया।

ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत को ‘टॉप टियर पार्टनर’ घोषित करने एवं रक्षा लेखों एवं सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान एमओयू के प्रस्ताव का स्वागत किया। श्री सिंह ने ऑस्ट्रेलियाई व्यवसाय समुदाय से कटिंग-एज तकनीक विकसित करने, उन्नत प्लेटफॉर्म निर्माण करने एवं क्षेत्रीय शांति के लिए उद्योगों को रणनीतिक सक्षमकर्ता बनाने का आह्वान किया।

भारतीय समुदाय से संवाद

शाम को सिडनी में भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में श्री सिंह ने भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं आर्थिक पुल के रूप में उनकी भूमिका की सराहना की।

यात्रा के व्यापक प्रभाव

यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया की पहली रक्षा व्यापार मिशन (7-10 अक्टूबर 2025) के साथ मेल खाती है, जो भारत में आयोजित हो रही है। दोनों देशों ने संयुक्त अभ्यासों जैसे ‘तालीस्मन साबर’ 2025 में भारत की भागीदारी, ‘पुक पुक’ एवं ‘ऑस्ट्राहिंद’ अभ्यासों का विस्तार, तथा एयर-मिसाइल रक्षा, सुरक्षित संचार एवं अनक्रूड एरियल सिस्टम में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर सहमति जताई। इंडो-पैसिफिक को मुक्त, खुला, शांतिपूर्ण एवं समृद्ध बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासागरीय विधि संधि (यूएनसीएलओएस) के तहत नौवहन स्वतंत्रता एवं व्यापार पर जोर दिया गया।

ट्राइलेरल (भारत-ऑस्ट्रेलिया-इंडोनेशिया) एवं क्वाड प्रारूपों के तहत सहयोग बढ़ाने तथा कोप इंडिया एयर अभ्यास 2025 में जापान के साथ अवलोकन पर चर्चा हुई। श्री सिंह की यात्रा ने न केवल रक्षा सहयोग को मजबूत किया, बल्कि आर्थिक एवं तकनीकी साझेदारी को भी गति प्रदान की।

निष्कर्ष: नई साझेदारी की शुरुआत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में एक मील का पत्थर साबित हुई। वार्षिक रक्षा मंत्रियों संवाद एवं संयुक्त स्टाफ वार्ताओं से सहयोग और गहरा होगा। क्या यह यात्रा इंडो-पैसिफिक में नई स्थिरता लाएगी? समय ही बताएगा, लेकिन दोनों देशों की प्रतिबद्धता क्षेत्रीय शांति के लिए प्रेरणादायक है।(श्री चाड नायडू, विशेष संवाददाता ऑस्ट्रेलिया द्वारा रिपोर्ट)

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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