लेखक: श्री मिथिलेश वर्मा, सलाहकार — SSN उत्तर प्रदेश
नई दिल्ली, 17 अगस्त 2026
भारत की शिक्षा व्यवस्था इस समय एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के बाद स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता पर नए सिरे से ध्यान दिया जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार NEP के तहत शिक्षा को अधिक लचीला, कौशल-आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में कई कदम आगे बढ़े हैं।
UDISE+ रिपोर्ट से सामने आई सकारात्मक तस्वीर
स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों में नामांकन, शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों के स्कूल में बने रहने, संक्रमण दर, छात्राओं की भागीदारी और स्कूल बुनियादी ढांचे में सुधार के संकेत मिले हैं। यह बदलाव शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
हालांकि केवल नामांकन बढ़ना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शिक्षक, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, डिजिटल सुविधाएं और रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।
परीक्षा प्रणाली में रटने के बजाय समझ पर जोर
शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव परीक्षा प्रणाली को लेकर भी दिखाई दे रहा है। बोर्ड परीक्षाओं में ऐसे प्रश्नों को बढ़ावा देने की दिशा में काम हो रहा है जिनमें विद्यार्थियों की समझ, विश्लेषण क्षमता और ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने की क्षमता का आकलन हो। यह बदलाव रटने की संस्कृति को कम करके विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित करने में मदद कर सकता है।
उच्च शिक्षा में भी बदलाव
उच्च शिक्षा में NEP 2020 के तहत बहुविषयक अध्ययन, क्रेडिट आधारित शिक्षा, कौशल विकास और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर बढ़ा है। सरकार की नीति में व्यावसायिक एवं कौशल शिक्षा को मुख्यधारा की उच्च शिक्षा से जोड़ने का उद्देश्य विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता, उद्यमिता और आजीवन सीखने की क्षमता को मजबूत करना है।
इसी क्रम में UGC ने जुलाई 2026 सत्र में SWAYAM के स्वीकृत ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालयों में उपलब्ध कराने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे विद्यार्थियों को अपने नियमित पाठ्यक्रम के साथ अतिरिक्त विषय और कौशल सीखने का अवसर मिल सकता है।
NCERT को मिला नया अवसर
हाल में NCERT को Institution Deemed to be University का दर्जा दिए जाने की पुष्टि शिक्षा मंत्रालय की ओर से हुई है। इससे शिक्षा अनुसंधान, शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक विकास के क्षेत्र में NCERT की भूमिका और व्यापक होने की संभावना है।
डिजिटल शिक्षा और AI का बढ़ता प्रभाव
आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑनलाइन लर्निंग और डिजिटल संसाधन शिक्षा के महत्वपूर्ण हिस्से बन सकते हैं। लेकिन डिजिटल शिक्षा का विस्तार तभी प्रभावी होगा जब ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी इंटरनेट, उपकरण और गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री की समान पहुंच मिले।
चुनौतियां अभी भी बड़ी हैं
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बावजूद कई चुनौतियां मौजूद हैं। संसद की एक समिति ने कक्षा 9 से 12 के संशोधित पाठ्यक्रम और नई पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता के बीच अंतर पर चिंता जताई है। शिक्षकों को नए पाठ्यक्रम के अनुरूप पर्याप्त प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक उपलब्धता, सरकारी विद्यालयों की आधारभूत सुविधाएं, डिजिटल विभाजन और उच्च शिक्षा की लागत जैसे मुद्दों पर लगातार काम करने की आवश्यकता है।
शिक्षा को रोजगार से जोड़ना समय की मांग
आज का विद्यार्थी केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल और रोजगार के अवसर चाहता है। इसलिए स्कूल स्तर से ही व्यावसायिक शिक्षा, कंप्यूटर, AI, वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता और संचार कौशल जैसे विषयों को व्यावहारिक रूप में जोड़ना जरूरी है।
श्री मिथिलेश वर्मा का विचार
“भारत की शिक्षा व्यवस्था का लक्ष्य केवल अधिक से अधिक डिग्रियां देना नहीं होना चाहिए। हमारा उद्देश्य ऐसा शिक्षित और कुशल युवा तैयार करना होना चाहिए जो बदलती अर्थव्यवस्था, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर सके। शिक्षा में समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षक, आधुनिक तकनीक और रोजगारपरक कौशल—इन चारों का संतुलन भारत के भविष्य को मजबूत करेगा।”
SSN विशेष: भारत में शिक्षा सुधार का अगला चरण केवल पाठ्यक्रम बदलने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वास्तविक सफलता तब होगी जब हर विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और अपनी प्रतिभा के अनुसार आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



