वाशिंगटन, 12 जनवरी 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उसने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डों या हितों को निशाना बनाया, तो अमेरिका ऐसी ताकत से जवाब देगा जो ईरान ने कभी नहीं देखी होगी। यह बयान ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है, जहां ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर क़ालीबाफ ने अमेरिका को धमकी दी थी कि अगर वाशिंगटन ने सैन्य हस्तक्षेप किया, तो ईरान इजरायल और अमेरिकी अड्डों को ‘वैध लक्ष्य’ मानेगा।
ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा, “अगर वे ऐसा करेंगे, तो हम उन्हें ऐसे स्तर पर मारेंगे जो उन्होंने कभी नहीं देखा होगा। मेरे पास इतने मजबूत विकल्प हैं। अगर उन्होंने ऐसा किया, तो उन्हें एक बहुत शक्तिशाली ताकत का सामना करना पड़ेगा।” यह चेतावनी ईरान की ओर से आई धमकी के जवाब में आई, जहां क़ालीबाफ ने कहा था, “ईरान पर हमले की स्थिति में, कब्जे वाले क्षेत्र (इजरायल) के साथ-साथ सभी अमेरिकी अड्डे और जहाज हमारे वैध लक्ष्य होंगे।”
ईरान में विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावना
ईरान में पिछले कुछ हफ्तों से सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। ट्रंप प्रशासन इन प्रदर्शनों पर करीब से नजर रख रहा है और सैन्य हस्तक्षेप सहित ‘मजबूत विकल्पों’ पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने कहा, “हम इस पर बहुत गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सेना इस पर नजर रख रही है, और हम कुछ बहुत मजबूत विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हम फैसला लेंगे।”
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों की जानकारी दी गई है, लेकिन अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इन विकल्पों में तेहरान में गैर-सैन्य स्थलों पर हमले या प्रदर्शनों को दबाने वाली ईरानी सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाना शामिल हो सकता है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भी लिखा, “ईरान स्वतंत्रता की ओर देख रहा है, शायद पहले कभी नहीं देखी गई तरह। अमेरिका मदद के लिए तैयार है!!!”
ईरान की प्रतिक्रिया और धमकी
ईरानी संसद में क़ालीबाफ के बयान के दौरान सांसदों ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। उन्होंने अमेरिका को ‘गलत गणना’ न करने की चेतावनी दी और कहा कि ईरान केवल प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खतरे की धारणा के आधार पर कार्रवाई करेगा। ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनों को अमेरिका और इजरायल द्वारा प्रायोजित बताया है, और इसे इजरायल-ईरान युद्ध का विस्तार माना है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी कहा कि अमेरिका और इजरायल आर्थिक मुद्दों के बहाने ईरान में अशांति फैला रहे हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने प्रदर्शनों को ‘आतंकवाद’ का रूप बताया और अमेरिका-इजरायल को जिम्मेदार ठहराया।
क्षेत्रीय प्रभाव और अमेरिकी तैयारी
यह तनाव मध्य पूर्व में अमेरिकी हितों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। अमेरिकी सेना ने कहा कि वह क्षेत्र में ‘पूर्ण लड़ाकू क्षमता’ के साथ तैयार है और अपने बलों, भागीदारों और हितों की रक्षा करेगी। ईरान ने पहले भी कतर में अल उदेद एयर बेस और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें फ्लीट को निशाना बनाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनी के फैसले पर निर्भर करेगी। ट्रंप के वरिष्ठ अधिकारियों, जैसे विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, 13 जनवरी को ईरान पर विकल्पों पर चर्चा करेंगे।
यह घटनाक्रम अमेरिका-ईरान संबंधों को और खराब कर सकता है, खासकर जब दोनों देशों के बीच पहले से ही तनाव है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय प्रदर्शनों में हिंसा की निंदा कर रहा है, लेकिन सैन्य हस्तक्षेप की संभावना से चिंतित है। ट्रंप की यह चेतावनी ईरान को संदेश है कि अमेरिका पीछे नहीं हटेगा, लेकिन यह क्षेत्रीय युद्ध की आशंका भी बढ़ा रही है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




