नई दिल्ली/तेहरान, 24 मार्च 2026: मध्य पूर्व युद्ध में एक नया और खतरनाक मोड़ आ गया है। ईरान ने हिंद महासागर में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह ईरान की अब तक की सबसे लंबी दूरी (लगभग 4000 किलोमीटर) वाली मिसाइल हमले की कोशिश मानी जा रही है। हालांकि, दोनों मिसाइलें अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाईं — एक बीच में फेल हो गई और दूसरी को अमेरिकी युद्धपोत ने इंटरसेप्ट कर गिरा दिया।
क्या हुआ ठीक-ठीक?
ब्रिटेन के रक्षा सचिव जॉन हीली ने संसद में पुष्टि की कि शुक्रवार की सुबह (21 मार्च की रात से शुक्रवार सुबह के बीच) ईरान ने दो मिसाइलें डिएगो गार्सिया की ओर लॉन्च कीं। एक मिसाइल लक्ष्य से पहले गिर गई, जबकि दूसरी को अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत से दागे गए इंटरसेप्टर मिसाइल (SM-3) ने नष्ट कर दिया। बेस पर कोई नुकसान नहीं हुआ और सामान्य संचालन जारी रहा।
अमेरिकी मीडिया (वॉल स्ट्रीट जर्नल, सीएनएन) और इजरायली सेना प्रमुख एयाल ज़ामिर ने दावा किया कि ईरान ने दो-चरण वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM/ICBM) का इस्तेमाल किया, जिसकी रेंज 4000 किलोमीटर से ज्यादा है। यह ईरान की पुरानी self-imposed रेंज लिमिट (2000 किमी) को पार करने वाली पहली घटना है।
डिएगो गार्सिया क्यों महत्वपूर्ण है?
- डिएगो गार्सिया हिंद महासागर के चागोस द्वीप समूह में स्थित एक छोटा द्वीप है।
- यहां अमेरिका-ब्रिटेन का संयुक्त नौसैनिक और हवाई अड्डा है, जिसे “अनसिंकेबल एयरक्राफ्ट कैरियर” कहा जाता है।
- यहां B-52, B-2 बमवर्षक, परमाणु पनडुब्बियां और लंबी दूरी के ऑपरेशन के लिए सुविधाएं हैं।
- ईरान-इजरायल युद्ध में अमेरिका इस बेस का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए कर रहा है, जिसके जवाब में ईरान ने इसे निशाना बनाया।
ईरान का इनकार
ईरान ने हमले की जिम्मेदारी से इनकार कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघई ने इसे “इजरायली फॉल्स फ्लैग अटैक” बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला ईरान ने नहीं किया, बल्कि युद्ध को बढ़ाने के लिए इजरायल ने किया है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और खतरा
- ब्रिटेन ने ईरान की “लापरवाह हरकतों” की निंदा की और डी-एस्केलेशन की अपील की।
- इजरायल ने कहा कि इस हमले से साबित होता है कि ईरान की मिसाइलें अब बर्लिन, पेरिस और रोम जैसे यूरोपीय शहरों तक पहुंच सकती हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला ईरान की मिसाइल क्षमता को नई ऊंचाई देता है और युद्ध को हिंद महासागर तक फैला सकता है।
- भारत के लिए चिंता: मिसाइलों का रास्ता भारत के समुद्री क्षेत्र के पास से गुजरा हो सकता है, हालांकि भारत पर कोई सीधा खतरा नहीं है।
यह घटना अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध के 25वें दिन हुई है। ट्रंप प्रशासन और ब्रिटेन दोनों ने इसे गंभीर माना है, लेकिन फिलहाल कोई बड़ा जवाबी हमला रिपोर्ट नहीं हुआ है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



