अम्मान/नई दिल्ली, 17 दिसंबर 2025 (विशेष संवाददाता): भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया जोर्डन यात्रा ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती दी है, बल्कि जोर्डन के हाशेमी शाही परिवार और भारत के बीच गहरे ऐतिहासिक बंधनों को भी फिर से सुर्खियों में ला दिया है। पीएम मोदी का यह दौरा 37 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला पूर्ण द्विपक्षीय दौरा था, जो भारत-जोर्डन के 75 वर्षों के राजनयिक संबंधों की स्वर्ण जयंती पर हुआ। लेकिन इसके पीछे एक दिलचस्प व्यक्तिगत कड़ी है – जोर्डन की पूर्व क्राउन प्रिंसेस सरवत एल हसन, जो मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली हैं। यह कहानी न केवल शाही वैभव की है, बल्कि सांस्कृतिक मिश्रण और मानवीय संबंधों की भी।
पीएम मोदी की यात्रा: राजपरिवार के साथ गर्मजोशी भरी मुलाकात
पीएम मोदी 15 दिसंबर को अम्मान पहुंचे, जहां राजा अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल हुसैन ने उन्हें अल-हुसैनीया पैलेस में गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद विरोधी प्रयास और जल प्रबंधन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। खास तौर पर, जोर्डन के क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय ने एक अनोखे इशारे में पीएम मोदी को स्वयं कार से जोर्डन म्यूजियम तक पहुंचाया। यह निजी स्पर्श भारत-जोर्डन मित्रता का प्रतीक बना।
यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संस्कृति, नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और पेट्रा-एलोरा के बीच जुड़ाव जैसे क्षेत्रों में कई समझौते पर हस्ताक्षर किए। राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने कहा, “भारत और जोर्डन के बीच संबंध सदियों पुराने हैं, और आज हम इन्हें भविष्य की दिशा दे रहे हैं।” पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “जोर्डन के साथ हमारी साझेदारी न केवल रणनीतिक है, बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय भी।”
सरवत एल हसन: भारत से जोर्डन की शाही महारानी तक का सफर
जोर्डन शाही परिवार का भारत से सबसे मजबूत और व्यक्तिगत संबंध पूर्व क्राउन प्रिंसेस सरवत एल हसन से जुड़ा है। 1947 में विभाजन से ठीक पहले, 22 जुलाई को कलकत्ता (अब कोलकाता) में सरवत इकरामुल्लाह के रूप में जन्मीं सरवत का परिवार पाकिस्तानी राजनयिक मोहम्मद इकरामुल्लाह का था। उनके पिता भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए, और सरवत का बचपन लाहौर, कराची और लंदन में बीता। ब्रिटेन की प्रतिष्ठित स्कूलों से शिक्षा प्राप्त करने वाली सरवत ने लंदन के राजनयिक मेलों में जोर्डन के प्रिंस हसन बिन तालाल से मुलाकात की।
1968 में कराची में हुई उनकी शादी ने सरवत को जोर्डन के हाशेमी राजवंश में शामिल कर लिया। प्रिंस हसन जोर्डन के क्राउन प्रिंस थे, जिससे सरवत 1968 से 1999 तक जोर्डन की क्राउन प्रिंसेस बनी रहीं। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जोर्डन में उन्होंने हसन स्कूल फॉर एक्सीलेंस जैसे संस्थानों की स्थापना की, जो आज भी हजारों छात्रों को शिक्षा प्रदान करता है। 1999 में जब प्रिंस हसन के भाई अब्दुल्ला द्वितीय राजा बने, तो क्राउन प्रिंस का पद उनके बेटे हुसैन को मिला, लेकिन सरवत का प्रभाव शाही परिवार में आज भी बरकरार है।
सरवत की कहानी भारत, पाकिस्तान और जोर्डन को जोड़ती है। उन्होंने कभी अपनी भारतीय जड़ों को नहीं छिपाया। जोर्डन में भारतीय संस्कृति के प्रचार में उनकी भूमिका रही है, और वे अक्सर कोलकाता की यादों को साझा करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संबंध मध्य पूर्व में भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करता है।
ऐतिहासिक और राजनयिक बंधन: 75 वर्षों की साझेदारी
भारत और जोर्डन के बीच राजनयिक संबंध 1950 में स्थापित हुए थे, लेकिन ऐतिहासिक रूप से ये सदियों पुराने हैं। हाशेमी राजवंश, जो पैगंबर मुहम्मद के वंशज होने का दावा करता है, ने हमेशा इस्लामी दुनिया में शांति और संवाद की भूमिका निभाई है। 2018 में राजा अब्दुल्ला द्वितीय की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर समझौते किए। वर्तमान में, जोर्डन भारत का प्रमुख फॉस्फेट आपूर्तिकर्ता है, जबकि भारत जोर्डन को कृषि और आईटी समर्थन देता है।
जोर्डन में करीब 20,000 भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो स्वास्थ्य, आईटी और निर्माण क्षेत्रों में योगदान देते हैं। पीएम मोदी की यात्रा ने इन बंधनों को और मजबूत किया, खासकर इजरायल-हमास संघर्ष के बीच क्षेत्रीय स्थिरता पर।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




