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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के ‘मास माइग्रेशन’ वाले बयान पर बवाल: ‘उषा को भारत वापस भेजो’,

वाशिंगटन, 8 दिसंबर 2025: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के हालिया बयान ने सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया है। वैंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बड़े पैमाने पर प्रवासन को ‘अमेरिकी सपने की चोरी’ करार दिया, जिसके जवाब में नेटिजेंस ने उनकी पत्नी उषा चिलुकुरी वैंस की भारतीय मूल की जड़ों को निशाना बनाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने व्यंग्यात्मक रूप से कहा, ‘उषा को भारत वापस भेज दो’, जबकि कुछ ने इसे नस्लवाद और पाखंड का प्रतीक बताया। यह विवाद ट्रंप प्रशासन की सख्त आप्रवासन नीतियों के बीच और तेज हो गया है।

वैंस का विवादास्पद बयान: ‘प्रवासन चोरी है’

जेडी वैंस ने 7 दिसंबर को एक्स पर पोस्ट किया, “बड़े पैमाने पर प्रवासन अमेरिकी सपने की चोरी है। यह अमेरिकी श्रमिकों से अवसर छीन रहा है। जो अध्ययन इसके विपरीत कहते हैं, वे पुरानी व्यवस्था से अमीर होने वालों द्वारा प्रायोजित हैं।” वैंस ने आगे कहा कि ट्रंप प्रशासन अवैध प्रवासियों को जितना संभव हो उतना हटाने की कोशिश करेगा। यह बयान न्यूयॉर्क पोस्ट पॉडकास्ट में उनके पहले के कमेंट्स से जुड़ता है, जहां उन्होंने कहा था कि पड़ोसियों का रंग, भाषा या नस्ल एक जैसी होना ‘तर्कसंगत’ है।

ट्रंप सरकार ने हाल ही में 19 ‘उच्च जोखिम’ देशों से आप्रवासन आवेदनों पर रोक लगा दी है, जिसमें ग्रीन कार्ड, शरण और नागरिकता शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह वाशिंगटन डीसी में एक अफगान शरणार्थी द्वारा नेशनल गार्ड सदस्य की हत्या के बाद सुरक्षा के लिए है, लेकिन प्रवासी परिवार इसे ‘सामूहिक सजा’ बता रहे हैं।

पत्नी उषा पर हमला: ‘उदाहरण पेश करो, टिकट बुक करो’

वैंस के बयान पर प्रतिक्रिया तुरंत आई। लेखक वजाहत अली ने लिखा, “इसका मतलब है कि आपको उषा, उनके भारतीय परिवार और मिश्रित नस्ल के बच्चों को भारत वापस भेजना होगा। जब टिकट बुक कर लो तो बताना। आपको उदाहरण पेश करना चाहिए।” एक अन्य यूजर ने कहा, “मुझे यह सब से तंग आ गया है। उषा का परिवार आंध्र प्रदेश में क्या कर रहा है? उन्हें इस नस्लवादी के खिलाफ बोलना चाहिए। उषा क्यों अपनी जाति और धर्म का अपमान सहन कर रही हैं? अब मुझे यह जानने में ज्यादा रुचि है कि उन्होंने इस व्यक्ति से शादी क्यों की।”

एक यूजर ने सीधे पूछा, “रुको, क्या तुम्हारी पत्नी भारतीय अप्रवासी परिवार से नहीं है?” सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई, जहां वैंस को ‘पाखंडी’ कहा जा रहा है। उषा वैंस, जो भारतीय-अमेरिकी हैं और येल लॉ स्कूल की पूर्व छात्रा हैं, के माता-पिता आंध्र प्रदेश से अमेरिका आए थे। वैंस के तीन बच्चे भी मिश्रित नस्ल के हैं।

भारतीय समुदाय में आक्रोश: ‘अमेरिकी मूल्यों का अपमान’

भारत और भारतीय डायस्पोरा में भी गुस्सा भड़क गया। मुंबई के कुश मेहता ने सीएनएन को बताया, “यह हास्यास्पद और पूरी तरह गलत है।” न्यू डेली की शुभांगी शर्मा ने इसे ‘धार्मिक रूपांतरण का राष्ट्रपति कॉल’ कहा। द हिंदू अखबार की आरिना अरोरा ने लिखा कि वैंस का रुख ‘व्यक्तिगत’ नहीं रह जाता जब एक चुने हुए नेता द्वारा कहा जाता है।

यह विवाद वैंस के पिछले बयानों से जुड़ता है। नवंबर 2025 में उन्होंने कहा था कि वे उम्मीद करते हैं कि उनकी हिंदू पत्नी उषा एक दिन ईसाई धर्म अपनाएंगी। इस पर भी बवाल मचा था, और वैंस ने सफाई दी कि उषा का ‘धर्म परिवर्तन करने का कोई इरादा नहीं है’। एक एक्स यूजर ने कहा, “यह अमेरिकी मूल्यों का अपमान है; यह कमजोर नेतृत्व है, जो उषा की गरिमा की रक्षा नहीं कर रहा।”

आगे की राह: आप्रवासन बहस और राजनीतिक नुकसान

विशेषज्ञों का कहना है कि वैंस का यह बयान ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को मजबूत करने का प्रयास है, लेकिन यह भारतीय-अमेरिकी समुदाय को नाराज कर रहा है, जो अमेरिका की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सोशल मीडिया पर #SendUshaBackToIndia ट्रेंड कर रहा है, जबकि वैंस के समर्थक इसे ‘अवैध प्रवासन’ के खिलाफ खड़े होने का उदाहरण बता रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, “मैं विदेशी भाषा बोलने वाले परिवार के पड़ोसी बनना पसंद करूंगा बजाय एक घृणित, नफरत फैलाने वाले MAGA कचरे के। वैंस अपनी पत्नी और बच्चों का भी अपमान कर रहे हैं। भाग जाओ उषा!”

यह घटना अमेरिकी राजनीति में नस्ल, धर्म और आप्रवासन के मुद्दों को और उजागर कर रही है, जहां वैंस जैसे नेता अपनी नीतियों से अपने ही परिवार की जड़ों को निशाना बना रहे हैं।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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