नई दिल्ली, 4 अगस्त 2026
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की करारी हार के ठीक अगले दिन जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सुप्रीमो और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात संसद भवन में पीएम के कार्यालय कक्ष में हुई, जिसे दोनों पक्षों ने “शिष्टाचार मुलाकात” बताया है। लेकिन सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
मुलाकात की पृष्ठभूमि
बांकीपुर सीट पर 30 जुलाई को हुए उपचुनाव का परिणाम 3 अगस्त को आया। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 मतों के बड़े अंतर से हराया। प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा को 44,827 वोट। आरजेडी की रेखा कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं।
यह सीट 1995 से लगातार भाजपा के कब्जे में थी। पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और बाद में उनके बेटे नितिन नवीन (वर्तमान भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष) यहां से जीतते रहे। नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद सीट खाली हुई थी। ऐसे मजबूत गढ़ में हार ने एनडीए को झटका दिया है।
मुलाकात के दौरान नीतीश कुमार के साथ जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह (राजीव रंजन सिंह) भी मौजूद रहे। नीतीश कुमार ने खुद एक्स पर लिखा, “आज नई दिल्ली स्थित संसद भवन में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कार्यालय कक्ष में उनसे शिष्टाचार मुलाकात की।” संजय झा ने भी बताया कि बिहार और पूर्वोत्तर भारत के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
क्या-क्या अटकलें लगाई जा रही हैं?
- एनडीए में असंतोष की चर्चा जदयू के कुछ नेताओं का कहना है कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने रहते तो बांकीपुर में हार नहीं होती। जदयू विधायक अनंत सिंह ने भी कहा कि जनता नाराज है। ऐसे में अटकलें हैं कि नीतीश कुमार ने पीएम से बिहार की स्थिति और गठबंधन की रणनीति पर बात की होगी।
- प्रशांत किशोर फैक्टर जन सुराज पार्टी को नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी, लेकिन बांकीपुर में जीत से प्रशांत किशोर ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। राजनीतिक विश्लेषक इसे बिहार की बदलती प्राथमिकताओं का संकेत मान रहे हैं। मुलाकात को इस नए समीकरण को लेकर एनडीए की समीक्षा से जोड़ा जा रहा है।
- बिहार की सत्ता समीकरण वर्तमान में बिहार में सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं। नीतीश कुमार पूर्व मुख्यमंत्री हैं। मुलाकात के बाद कुछ हलकों में यह चर्चा भी चल रही है कि क्या एनडीए में कोई बड़ा बदलाव या समन्वय की जरूरत महसूस की जा रही है।
- विकास एजेंडा आधिकारिक रूप से मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया गया है। संजय झा के अनुसार विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। डबल इंजन सरकार के तहत बिहार के विकास रोडमैप पर बात होना स्वाभाविक है।
सियासी माहौल
बांकीपुर की हार के बाद भाजपा नेताओं ने भी आत्ममंथन की बात कही है। वहीं विपक्ष इसे एनडीए सरकार के खिलाफ जनता के असंतोष के रूप में पेश कर रहा है। प्रशांत किशोर ने जीत के बाद कहा कि वे विपक्ष का चेहरा नहीं बनना चाहते, लेकिन उनकी जीत ने बिहार की राजनीति में नया अध्याय जरूर खोल दिया है।
नीतीश कुमार और पीएम मोदी के रिश्ते पिछले वर्षों में उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 2013 में नीतीश ने मोदी की प्रधानमंत्री उम्मीदवारी का विरोध किया था, फिर कई बार गठबंधन टूटा और बना। लेकिन हाल के वर्षों में दोनों पक्ष एनडीए में साथ हैं।
यह मुलाकात महज शिष्टाचार की हो या उससे कहीं ज्यादा, राजनीतिक हलकों में इसकी गूंज साफ सुनाई दे रही है। बांकीपुर की हार के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें तेज हो गई हैं। आगे क्या होता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल सियासी पंडित इस मुलाकात को एनडीए की बिहार रणनीति की समीक्षा के रूप में देख रहे हैं।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



