नई दिल्ली: स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की संयुक्त सचिव और जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) पर पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को रोक लगा दी है। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
क्या है मामला?
यह मामला 2021 का है, जो बाराखंबा रोड पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। आरोप है कि आइशी घोष ने बांग्ला भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान सरकारी आदेश का उल्लंघन किया था। उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (सार्वजनिक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा) और धारा 447 (आपराधिक अतिचार) के तहत मामला दर्ज है। इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
अप्रैल 2026 में कोर्ट ने उनके खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी किया था क्योंकि वे पिछले सुनवाई की तारीख पर पेश नहीं हो पाई थीं।
कोर्ट का फैसला
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विजयश्री राठौर ने आइशी घोष की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए एनबीडब्ल्यू पर रोक लगा दी। उनके वकील ने बताया कि पिछली तारीख पर वे अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण पेश नहीं हो सकी थीं। कोर्ट ने उन्हें अगली तारीख (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 30 जुलाई या 30 अगस्त) पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
पुलिस की गिरफ्तारी की कोशिश
इससे एक दिन पहले दिल्ली पुलिस ने सीपीएम के राष्ट्रीय मुख्यालय एकेजी भवन में आइशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश की थी। सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने पुलिस अधिकारी का सामना किया और सुप्रीम कोर्ट के डीके बासु फैसले का हवाला देते हुए विरोध जताया। पुलिस टीम के कुछ सदस्य वर्दी में नहीं थे। सीपीएम ने इसे छात्र नेताओं के खिलाफ “विच-हंटिंग” बताया।
एसएफआई और वामपंथी संगठनों का आरोप है कि हालिया जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में शामिल नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई पुराने कोर्ट आदेश के तहत थी और हालिया प्रदर्शनों से जुड़ी नहीं है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



