नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह फैसला नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद और देशभर में चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच लिया। प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पत्र साझा करते हुए इसकी जानकारी दी।
अपने पत्र में प्रधान ने लिखा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें दुखी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का मुद्दा नहीं है। उनका मकसद यह है कि जंतर मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बनी स्थिति का फायदा कोई “राष्ट्र-विरोधी ताकत” न उठाए, देश की एकता बनी रहे, किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे और बच्चे अपनी पढ़ाई व करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है।
प्रधान ने बताया कि 3 मई 2026 को हुई नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बाद सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया। जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द की गई और दोबारा परीक्षा की तारीख घोषित की गई। साथ ही अगले साल से परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में कराने का फैसला भी लिया गया। उन्होंने कहा कि पहले दिन से उन्होंने जिम्मेदारी ली और कभी मुंह नहीं मोड़ा। उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी मेधावी छात्र का भविष्य बर्बाद न हो और किसी के साथ अन्याय न हो।
यह इस्तीफा दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चल रहे लंबे विरोध प्रदर्शन के बीच आया है। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग में कथित अनियमितताओं और सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार की मांग कर रहे थे। प्रधान का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल था। समाचारों के अनुसार, यह मोदी सरकार में सार्वजनिक दबाव के कारण किसी मंत्री का इस्तीफा देने का दुर्लभ मामला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने इस खबर पर जश्न मनाया, जबकि सीजेपी ने कहा कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और अन्य मांगों (जैसे मुआवजा और पुलिस कार्रवाई) पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




