डॉ. सुधा सिंह, एमबीबीएस, डीजीओ, पूर्व सीएमओ हरविलास अस्पताल लखनऊ, सीनियर इनफर्टिलिटी एवं आईवीएफ एक्सपर्ट, पौरुष हॉस्पिटल, मोहनलालगंज, लखनऊ (यूपी) की मालिक।
इंटरव्यूअर: सीनियर एडिटर, एसएनएन नेटवर्क
प्रश्न 1: मैडम, आईवीएफ के बारे में कुछ बताइए। आपने 1993 में कोलकाता से ट्रेनिंग के बाद इस क्षेत्र में काम कब शुरू किया?
डॉ. सुधा सिंह: आईवीएफ (In Vitro Fertilization) एक ऐसी मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें पत्नी के अंडाणु (egg) और पति के शुक्राणु (sperm) को शरीर के बाहर लैब में फर्टिलाइज किया जाता है और फिर विकसित भ्रूण (embryo) को गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। मैंने 1993 में कोलकाता से विशेष ट्रेनिंग पूरी करने के बाद लखनऊ में इस क्षेत्र में काम शुरू किया। उस समय यह तकनीक बहुत नई थी, लेकिन मैंने देखा कि बांझपन की समस्या से जूझ रहे दंपत्तियों के लिए यह कितनी बड़ी उम्मीद है। पिछले तीन दशकों से मैं पौरुष हॉस्पिटल में आम आदमी के लिए इस सेवा को सुलभ बनाने की कोशिश कर रही हूं।
प्रश्न 2: जो दंपत्ति प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्त नहीं कर पाते, उनके लिए यह कितना महंगा है?
डॉ. सुधा सिंह: लागत संस्थान और विशेषज्ञ के अनुसार अलग-अलग होती है। आमतौर पर एक चक्र (cycle) की कीमत 4 लाख से 7 लाख रुपये तक हो सकती है, जिसमें दवाइयां, टेस्ट, प्रक्रिया और फॉलो-अप शामिल हैं। पौरुष हॉस्पिटल जैसे केंद्रों में हम इसे नाममात्र दर पर रखने की कोशिश करते हैं ताकि मध्यम वर्ग के लोग भी इसका लाभ ले सकें।
प्रश्न 3: दंपत्तियों को आईवीएफ का विकल्प कब चुनना चाहिए? उम्र के हिसाब से क्या सलाह देंगी?
डॉ. सुधा सिंह: महिलाओं की उम्र 35 वर्ष से कम हो तो सफलता की संभावना ज्यादा होती है। अगर एक साल नियमित प्रयास के बाद भी प्राकृतिक गर्भधारण न हो तो तुरंत फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लें। 30-35 साल की उम्र आदर्श मानी जाती है। देर करने से अंडाणुओं की गुणवत्ता घटती है।
प्रश्न 4: आप तीन दशकों से आम लोगों की सेवा कर रही हैं। परिवार में ‘बांझ’ जैसे शब्दों से दबाई जाने वाली महिलाओं के लिए क्या सलाह है?
डॉ. सुधा सिंह: बांझपन पुरुष या महिला दोनों में हो सकता है, यह कोई स्त्री का दोष नहीं है। महिलाएं हिम्मत न हारें। सही जांच और समय पर इलाज से ज्यादातर मामलों में सफलता मिल जाती है। परिवार को सपोर्ट करना चाहिए, न कि ताने मारने चाहिए। पौरुष हॉस्पिटल में हम काउंसलिंग भी देते हैं।
प्रश्न 5: सरकार आईवीएफ सेंटर्स क्यों नहीं स्थापित करती? क्या प्राइवेट अस्पताल ही बेहतर हैं?
डॉ. सुधा सिंह: सरकार बेसिक मेडिकल सुविधाएं दे रही है, जो जरूरी है। लेकिन आईवीएफ में बहुत सटीक स्टेप्स, एडवांस्ड लैब और निरंतर मॉनिटरिंग चाहिए। यह समय लेने वाली प्रक्रिया है। प्राइवेट अस्पताल नाममात्र दर पर बेहतर सेवा दे सकते हैं।
प्रश्न 6: एक चक्र आईवीएफ के लिए पर्याप्त बजट कितना होना चाहिए?
डॉ. सुधा सिंह: संस्थान के अनुसार 4 लाख से 7 लाख रुपये। पौरुष हॉस्पिटल में हम इसे किफायती रखते हैं।
प्रश्न 7: आईवीएफ की सफलता दर कितनी है?
डॉ. सुधा सिंह: औसतन 40% सफलता दर है। हार्मोनल रिस्पॉन्स, उम्र और स्टाफ की सतर्कता बहुत महत्वपूर्ण है। अच्छी लैब और अनुभवी टीम से दर बढ़ सकती है।
इंटरव्यू समाप्त: मैडम, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मूल्यवान समय देने के लिए।
आईवीएफ पर बेसिक जानकारी (Basics of IVF)
आईवीएफ प्रक्रिया के मुख्य चरण:
- ओवेरियन स्टिमुलेशन (दवाओं से अंडाणु बढ़ाना)
- अंडाणु रिट्रीवल
- फर्टिलाइजेशन (लैब में)
- एम्ब्रियो कल्चर
- एम्ब्रियो ट्रांसफर
- प्रेग्नेंसी टेस्ट
सफलता दर: भारत में औसत 35-40% प्रति चक्र (महिला की उम्र <35 वर्ष में ज्यादा)।
लागत: टियर-2 शहरों जैसे लखनऊ में 1-2.5 लाख से शुरू, लेकिन पूर्ण पैकेज 4-7 लाख तक।
यह आर्टिकल एसएनएन नेटवर्क के लिए तैयार किया गया है। अधिक जानकारी या अपॉइंटमेंट के लिए पौरुष हॉस्पिटल, मोहनलालगंज, लखनऊ से संपर्क करें।

Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




