इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक बार फिर गिलगित-बाल्टिस्तान की संवैधानिक स्थिति को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक हलकों और मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पाँचवाँ प्रांत बनाने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विश्लेषकों का कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान लंबे समय से विशेष प्रशासनिक व्यवस्था के तहत संचालित होता रहा है। इस क्षेत्र को पूर्ण प्रांतीय दर्जा देने का मुद्दा वर्षों से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रहा है।
इसी बीच, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और अपुष्ट दावों में यह भी कहा जा रहा है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान के नियंत्रण से अलग हो जाएगा। हालांकि, इस दावे की किसी विश्वसनीय या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। वर्तमान समय में बलूचिस्तान पाकिस्तान का एक मान्यता प्राप्त प्रांत है, जहाँ समय-समय पर सुरक्षा चुनौतियाँ और अलगाववादी गतिविधियाँ सामने आती रही हैं, लेकिन इसे पाकिस्तान से अलग घोषित नहीं किया गया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भविष्य में गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा दिया जाता है, तो इसका प्रभाव पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। भारत भी गिलगित-बाल्टिस्तान को जम्मू-कश्मीर के उस हिस्से के रूप में मानता है जो पाकिस्तान के नियंत्रण में है, इसलिए इस क्षेत्र से जुड़ा कोई भी संवैधानिक बदलाव संवेदनशील विषय माना जाता है।
फिलहाल, गिलगित-बाल्टिस्तान को पाँचवाँ प्रांत बनाए जाने या बलूचिस्तान के पाकिस्तान से अलग होने संबंधी किसी भी दावे पर आधिकारिक निर्णय का इंतजार है। ऐसे मामलों में केवल सरकारी अधिसूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा किया जाना चाहिए।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




