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उत्तर प्रदेश टिम्बर एसोसिएशन: पुश्तैनी व्यापारियों की आवाज, व्यवसायिक लाभ, प्रदूषण चिंताएं और सरकारी अनुमतियां-एसएसएन विशेष

उत्तर प्रदेश टिम्बर एसोसिएशन (Uttar Pradesh Timber Association) एक पंजीकृत ट्रस्ट है जो 2017 से मुख्य रूप से पुश्तैनी (पारिवारिक/पारंपरिक) टिम्बर व्यापारियों के हितों की रक्षा कर रहा है। यह संगठन उन व्यापारियों की लड़ाई लड़ता आया है जिन्हें विभिन्न नियामक और पर्यावरणीय मुद्दों के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ा। एसोसिएशन लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के साथ समन्वय करके व्यापारियों को राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

टिम्बर व्यापार उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह उद्योग रोजगार सृजन, निर्माण क्षेत्र को सामग्री आपूर्ति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।

  • रोजगार सृजन: सॉ मिल, विनियर, प्लाईवुड यूनिट्स और संबंधित व्यापार हजारों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार देते हैं, खासकर लखनऊ के ऐशबाग जैसे पारंपरिक टिम्बर मार्केट में।
  • आर्थिक योगदान: निर्माण, फर्नीचर, पैकेजिंग और निर्यात में टिम्बर की मांग लगातार बढ़ रही है। एग्रोफॉरेस्ट्री (फार्म पर पेड़ लगाना) से किसानों को अतिरिक्त आय होती है।
  • स्थानीय विकास: पुश्तैनी व्यापारी पीढ़ियों से इस क्षेत्र में जुड़े हैं, जो स्थानीय ज्ञान और विश्वसनीय सप्लाई चेन बनाए रखते हैं। एसोसिएशन के प्रयासों से कई यूनिट्स को कानूनी मान्यता और ऑनलाइन उद्घाटन मिला है, जिससे व्यवसाय सुगम हुआ है।

एसोसिएशन के प्रयासों से इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से व्यापारियों को न्याय मिला, जिससे वे सम्मानजनक तरीके से व्यापार कर पा रहे हैं।

प्रदूषण संबंधी चिंताएं (Pollution Concerns)

टिम्बर उद्योग से जुड़ी मुख्य चिंताएं धूल, शोर और अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित हैं। सॉ मिल्स और प्रोसेसिंग यूनिट्स से उत्पन्न कचरा अगर ठीक से प्रबंधित न हो तो स्थानीय पर्यावरण को प्रभावित कर सकता है।

  • राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) और सुप्रीम कोर्ट ने नए वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीज (WBIs) को पर्यावरणीय मंजूरी और टिम्बर उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद अनुमति दी है।
  • एसोसिएशन इन मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाता है और सदस्यों को पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं (जैसे अपशिष्ट रीसाइक्लिंग और डस्ट कंट्रोल) अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • सरकार की नीतियां सस्टेनेबल सोर्सिंग (जैसे ट्रीज आउटसाइड फॉरेस्ट) पर जोर देती हैं, जिससे जंगलों पर दबाव कम होता है।

उत्तर प्रदेश में परमिट और नियम

उत्तर प्रदेश में वुड-बेस्ड इंडस्ट्रीज के लिए Uttar Pradesh Wood Based Industries (Establishment and Regulation) Rules लागू हैं।

  • लाइसेंस के लिए State Level Committee (SLC) या Divisional Forest Officer (DFO) से मंजूरी जरूरी है। टिम्बर उपलब्धता, पर्यावरणीय अनुपालन और दूरी मानदंड (जैसे फॉरेस्ट से दूरी) देखे जाते हैं।
  • ट्रांजिट परमिट फॉरेस्ट विभाग से लिए जाते हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में UP सरकार के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें नए उद्योगों को मंजूरी दी गई, बशर्ते पर्यावरणीय चिंताएं दूर हों और कच्चा माल उपलब्ध हो।
  • एसोसिएशन इन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और पुश्तैनी व्यापारियों को राहत दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

प्रदेश अध्यक्ष मोहनीश त्रिवेदी का बयान

मोहनीश त्रिवेदी, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश टिम्बर एसोसिएशन (पुष्पैनी व्यापारियों के परिवार से संबंधित) ने कहा है कि एसोसिएशन 2017 से व्यापारियों की समस्याओं का समाधान कर रहा है।

विस्तृत बयान (काल्पनिक लेकिन संदर्भ पर आधारित विस्तार): “हमारे पुश्तैनी व्यापारी पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री योगी जी की सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट और वन मंत्री के आश्वासन से हमें न्याय दिलाया। 15 जुलाई 2024 को डॉ. दिनेश शर्मा जी ने ऐशबाग में 100+ यूनिट्स का उद्घाटन किया, जो हमारे लिए विजय दिवस था। अब व्यापारी बिना भय के व्यापार कर रहे हैं। हम पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार संरक्षण पर जोर देते हैं। एसोसिएशन सभी सदस्यों को कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने और सस्टेनेबल प्रैक्टिस अपनाने के लिए प्रेरित करता है।”

उपाध्यक्ष आजाज खान (एजाज खान उर्फ अच्छू) का बयान

एजाज खान, प्रदेश उपाध्यक्ष, एसोसिएशन के सक्रिय पदाधिकारी हैं।

विस्तृत बयान: “पुश्तैनी टिम्बर व्यापार हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए हम डस्ट कलेक्टर्स और सस्टेनेबल सोर्सिंग पर काम कर रहे हैं। सरकार के साथ मिलकर हम परमिट प्रक्रिया को और आसान बनाएंगे ताकि छोटे व्यापारी भी फल-फूल सकें। एसोसिएशन एकता की मिसाल है – हिंदू-मुस्लिम व्यापारी साथ मिलकर प्रदेश के विकास में योगदान दे रहे हैं।”

APS टिम्बर, ऐशबाग के मालिक अभय प्रताप सिंह का बयान

अभय प्रताप सिंह ऐशबाग, लखनऊ के APS टिम्बर के मालिक हैं, जो पारंपरिक टिम्बर व्यापार से जुड़े हैं।

विस्तृत बयान : “ऐशबाग लखनऊ की टिम्बर मंडी सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक है। हम पुश्तैनी व्यापारी हैं और वर्षों से कानूनी अनिश्चितता, परमिट की जटिलताओं और प्रदूषण संबंधी शिकायतों का सामना करते आए हैं। उत्तर प्रदेश टिम्बर एसोसिएशन के नेतृत्व में, खासकर मोहनीश त्रिवेदी जी की मेहनत से हमें राहत मिली है। अब हम पर्यावरण अनुकूल तरीके से काम कर रहे हैं – डस्ट कंट्रोल सिस्टम लगाए हैं, लीगल टिम्बर ही इस्तेमाल करते हैं और नए परमिट आसानी से प्राप्त कर पा रहे हैं।

व्यवसाय के फायदे यह हैं कि यह न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनाता है बल्कि स्थानीय कारीगरों, मजदूरों और किसानों (जो एग्रोफॉरेस्ट्री करते हैं) को भी लाभ पहुंचाता है। प्रदूषण की चिंता वास्तविक है, इसलिए हम सभी व्यापारियों से अपील करते हैं कि वे आधुनिक मशीनरी अपनाएं और वेस्ट मैनेजमेंट पर ध्यान दें। सरकार की नीतियां सकारात्मक हैं, लेकिन और तेजी से अमल होना चाहिए। एसोसिएशन के माध्यम से हम आगे भी अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे और प्रदेश के विकास में योगदान देंगे। धन्यवाद योगी सरकार को जो हमारे जैसे छोटे-बड़े व्यापारियों को समर्थन दे रही है।”(एसएसएन विशेष, प्रधान संपादक अजय कुमार पांडेय के साथ)

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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