लखनऊ:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार एक महत्वाकांक्षी ‘विष मुक्त भोजन’ अभियान शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत राज्य की गौशालाएं न केवल गौ संरक्षण का केंद्र बनेंगी, बल्कि जैविक खेती और शुद्ध भोजन की आपूर्ति का प्रमुख माध्यम भी बन जाएंगी। UP गो-सेवा आयोग ने इस अभियान के लिए ‘फार्म टू कंज्यूमर’ (खेत से सीधे उपभोक्ता तक) मॉडल तैयार किया है।
योजना का उद्देश्य
आधुनिक कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी, पानी और भोजन विषाक्त हो चुका है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने गौशालाओं को केंद्र में रखकर विष मुक्त भोजन का अभियान शुरू करने का फैसला किया है। मुख्य उद्देश्य हैं:
- रासायनिक मुक्त (ऑर्गेनिक) सब्जियां, अनाज और अन्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना।
- गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और किसानों को सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराना।
- उपभोक्ताओं को शुद्ध, स्वस्थ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना।
योजना कैसे काम करेगी?
- गौशालाओं की भूमिका: चयनित गौशालाओं के आसपास (लगभग 5 किमी दायरे में) किसान रासायनिक मुक्त खेती करेंगे। गौशालाएं इन उत्पादों को इकट्ठा करके सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगी।
- डायरेक्ट डिलीवरी: स्थानीय परिवारों को घर-घर या गौशाला के माध्यम से शुद्ध सब्जियां, अनाज और अन्य फार्म प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराए जाएंगे।
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: गौ-मूत्र और गोबर का उपयोग करके जैविक खाद और कीटनाशक तैयार किए जाएंगे, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और रासायनिक निर्भरता कम होगी।
- आत्मनिर्भर गौशालाएं: गौशालाएं न केवल गायों का पालन-पोषण करेंगी, बल्कि उत्पादन केंद्र के रूप में भी काम करेंगी। इससे रोजगार सृजन भी होगा।
लाभ
- स्वास्थ्य के लिए: विष मुक्त भोजन से लोगों में बीमारियां कम होंगी और समग्र स्वास्थ्य सुधरेगा।
- किसानों के लिए: रासायनिक खेती की तुलना में ऑर्गेनिक उत्पादों को बेहतर दाम मिलेंगे और बाजार की चिंता नहीं रहेगी।
- पर्यावरण के लिए: मिट्टी, पानी और हवा प्रदूषण से मुक्त होंगे।
- गौ संरक्षण: गौशालाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से गायों की बेहतर देखभाल संभव होगी।
वर्तमान संदर्भ
यह योजना UP गो-सेवा आयोग की व्यापक कार्ययोजना का हिस्सा है। पहले से ही गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने, गोबर-गोमूत्र से जैविक उत्पाद बनाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास चल रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि गौशालाएं न केवल गौ सेवा का प्रतीक बनें, बल्कि ग्रामीण विकास और स्वस्थ भारत के अभियान का भी अहम हिस्सा बनें।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




