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स्वच्छ लखनऊ स्वस्थ लखनऊ-सरयू संध्या न्यूज़ विशेष

लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी, अपनी सांस्कृतिक विरासत, नवाबी अंदाज और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन हाल के वर्षों में यह शहर स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी एक नया मुकाम हासिल कर रहा है। “स्वच्छ लखनऊ, स्वस्थ लखनऊ” न केवल एक नारा है, बल्कि नगर निगम लखनऊ, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों का प्रतीक बन गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में लखनऊ ने मिलियन प्लस शहरों की श्रेणी में देशभर में तीसरा स्थान प्राप्त किया है—44वें स्थान से छलांग लगाते हुए। यह उपलब्धि कचरे के पहाड़ों को हटाकर हरे-भरे पार्क बनाने, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक भागीदारी की मिसाल है।

लखनऊ की स्वच्छता यात्रा: चुनौतियों से सफलता तक

कुछ वर्ष पहले तक लखनऊ में शिवरी और घैला जैसे डंपिंग साइट्स पर विशाल कचरे के ढेर थे, जो बीमारियों का कारण बन रहे थे। नगर निगम आयुक्त आईएएस गौरव कुमार के नेतृत्व में शहर ने क्रांतिकारी बदलाव देखा। उन्होंने कचरे को संसाधन में बदलने का मॉडल अपनाया—वेस्ट-टू-वेल्थ। घैला साइट को 72 एकड़ के हरे पार्क में तब्दील किया गया, जबकि शिवरी को आधुनिक वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट बनाया गया। अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार से शहर में अपशिष्ट प्रसंस्करण दर 48% से बढ़कर 85% हो गई।

नगर निगम लखनऊ नियमित स्वीपिंग, 4-बिन सिस्टम (गीला, सूखा, खतरनाक और इलेक्ट्रॉनिक कचरा), नागरिक फीडबैक ड्राइव और स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान चला रहा है। स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा, RRR सेंटर्स (Reduce, Reuse, Recycle) और स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रमों ने आम नागरिकों को जोड़ा है।

मंत्रियों के बयान

रक्षा मंत्री और लखनऊ सांसद श्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा: “मुझे यह जानकर अत्यंत हर्ष की अनुभूति हुई है कि राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में लखनऊ ने 44वें स्थान से छलांग लगाकर देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। यह लखनऊवासियों की सामूहिक भागीदारी और प्रयासों का परिणाम है। स्वच्छ लखनऊ स्वस्थ लखनऊ की दिशा में हम सबको मिलकर काम करना होगा।”

उन्होंने पहले भी एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना का उद्घाटन करते हुए कहा था कि यह परियोजना न केवल शहर के कचरा प्रबंधन को मजबूत करेगी बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाएगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छ भारत मिशन को हमेशा प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा था कि स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य राज्य सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। लखनऊ में स्वच्छता अभियानों की शुरुआत करते हुए उन्होंने जोर दिया कि सफाई सिर्फ सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। योगी जी के नेतृत्व में यूपी में ओडीएफ (ओपन डिफेकेशन फ्री) लक्ष्य हासिल करने के बाद अब गार्बेज फ्री शहरों पर फोकस है।

उद्योगपतियों और व्यवसायियों की भूमिका

उद्योग जगत भी स्वच्छ लखनऊ अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हो रहा है।एसएमएस वाटरग्रेस मेडिवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड के वरिष्ठ प्रशासनिक प्रमुख श्री अनिकेत जोशी ने कहा कि हम मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट में अग्रणी कंपनी हैं और हमारा मकसद हमेशा उत्तर प्रदेश और लखनऊ को साफ-सुथरा रखना है। हम मेडिकल वेस्ट क्लियरेंस के रियल टाइम सर्विस प्रोवाइडर हैं और प्रमुख कंपनियों और अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट का प्रबंधन करते हैं।

एक प्रमुख उद्योगपति ने बयान दिया: “स्वच्छता और स्वास्थ्य बिना उद्योगों का विकास अधूरा है। लखनऊ में कचरा प्रबंधन और हरित पहलों में भागीदारी करके हम न केवल पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं बल्कि सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल भी बना रहे हैं। राजनाथ सिंह जी की परियोजना ने हमें प्रेरित किया है कि अपशिष्ट को संसाधन बनाकर हम आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।”

कई कॉर्पोरेट घराने स्कूलों में स्वच्छता कार्यशालाएं, प्लांटेशन ड्राइव और वेस्ट मैनेजमेंट में सहयोग कर रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में जीरो वेस्ट टू लैंडफिल लक्ष्य अपनाए जा रहे हैं।

स्वस्थ लखनऊ: स्वच्छता का स्वास्थ्य से सीधा संबंध

स्वच्छता केवल सड़कों की सफाई नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की नींव है। कचरा प्रबंधन से वेक्टर जनित बीमारियों (डेंगू, मलेरिया आदि) में कमी आई है। नगर निगम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ समन्वय कर जागरूकता फैला रहा है। डॉक्टर्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छ वातावरण से श्वसन संबंधी समस्याएं, संक्रमण और अन्य रोग कम हो रहे हैं।

नागरिकों से अपील: घरेलू कचरा अलग-अलग करें, प्लास्टिक का कम उपयोग करें, स्वच्छता ऐप पर शिकायत दर्ज करें और स्वयं भाग लें।स्वच्छ लखनऊ स्वस्थ लखनऊ अब एक आंदोलन बन चुका है। राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, गौरव कुमार जैसे नेतृत्व और उद्योगपतियों के सहयोग से लखनऊ एक मॉडल शहर बन रहा है। यह सफलता दिखाती है कि जब सरकार, प्रशासन, उद्योग और नागरिक एकजुट हों तो असंभव भी संभव हो जाता है।

श्री जे पी मौर्य, यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि मेरी पहली प्राथमिकता रिकॉर्ड्स का डिजिटलकरण और रीयल टाइम मॉनिटरिंग शुरू था। लखनऊ में रीजनल ऑफिसर नियुक्त होने के बाद”मैंने शुगर इंडस्ट्री से पानी के अपव्यय प्रबंधन के रीयल टाइम सीसीटीवी रिकॉर्ड्स देने के लिए कहा”. सैंपलिंग पर सख्ती से पालन किया जाता है और उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाता है.

सरयू संध्या न्यूज़ और न्यूज़एशिया न्यूज़ ग्रुप नागरिकों से अपील करते हैं कि वे साफ-सुथरे और हरे-भरे लखनऊ के मिशन में सरकारी पहल का समर्थन करें।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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