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सावधान! बच्चों की सेहत के लिए खतरा बन रहे रंग-बिरंगे पैकेट वाले स्नैक्स, डॉक्टरों ने अभिभावकों को किया सतर्क

लखनऊ। आजकल बाजारों, स्कूलों के आसपास और छोटी दुकानों पर मिलने वाले रंग-बिरंगे पैकेट वाले स्नैक्स—जैसे कटोरी, लोटपोट, रिंग्स, काला जादू, मोटू-पतलू तथा इसी तरह के अन्य नमकीन और फ्लेवर्ड स्नैक्स—बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। कम कीमत और आकर्षक पैकेजिंग के कारण बच्चे इन्हें बार-बार खरीदते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड (Ultra-Processed) स्नैक्स का नियमित और अधिक मात्रा में सेवन बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

क्यों बढ़ रही है चिंता?

अधिकांश पैकेट वाले स्नैक्स में स्वाद बढ़ाने के लिए अधिक नमक, परिष्कृत मैदा, तेल, कृत्रिम फ्लेवर और रंग का उपयोग किया जाता है। इनका कभी-कभार सेवन सामान्यतः अलग बात है, लेकिन यदि बच्चे रोजाना या बार-बार इन्हें खाते हैं, तो संतुलित भोजन की जगह ऐसे खाद्य पदार्थ लेने की आदत बन सकती है।

बच्चों में हो सकती हैं ये समस्याएं

डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक मात्रा में ऐसे स्नैक्स खाने से निम्न समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है—

  • मोटापा और तेजी से वजन बढ़ना।
  • दांतों की समस्याएं और कैविटी।
  • पेट दर्द, गैस, कब्ज या अपच।
  • संतुलित भोजन की कमी के कारण पोषण संबंधी समस्याएं।
  • अधिक नमक के लंबे समय तक सेवन से भविष्य में उच्च रक्तचाप का जोखिम बढ़ सकता है।
  • मीठे या अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के लगातार सेवन से टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ने में योगदान हो सकता है।
  • बच्चों में जंक फूड की आदत विकसित होना, जिससे फल, दूध और घर का पौष्टिक भोजन कम पसंद आने लगता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के शरीर के विकास के लिए प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम, आयरन और फाइबर की आवश्यकता होती है। यदि बच्चे बार-बार पैकेट वाले स्नैक्स खाते हैं, तो उन्हें आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता-पिता बच्चों के टिफिन और नाश्ते में घर का बना पौष्टिक भोजन, मौसमी फल, भुना चना, मखाना, मूंगफली, दही, अंकुरित अनाज और सूखे मेवे जैसे विकल्प शामिल करें।

माता-पिता रखें इन बातों का ध्यान

  • बच्चों को रोजाना पैकेट वाले स्नैक्स खाने की आदत न बनने दें।
  • खरीदने से पहले पैकेट पर निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और सामग्री (Ingredients) अवश्य पढ़ें।
  • यदि पैकेट फूला हुआ, फटा हुआ या एक्सपायरी के करीब हो, तो उसे न खरीदें।
  • बच्चों को टीवी और मोबाइल पर दिखने वाले विज्ञापनों से प्रभावित होकर बार-बार जंक फूड न लेने के लिए समझाएं।
  • सप्ताह में अधिकतर दिन घर का ताजा और संतुलित भोजन दें।

स्कूलों और दुकानदारों की भी जिम्मेदारी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों के आसपास अत्यधिक जंक फूड की बिक्री पर निगरानी रखी जानी चाहिए। दुकानदारों को भी सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानक के अनुरूप खाद्य उत्पाद ही बेचने चाहिए। यदि किसी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता या सुरक्षा पर संदेह हो, तो संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।

स्वस्थ बचपन, स्वस्थ भारत

बच्चों का स्वास्थ्य परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। कभी-कभार पैकेट वाले स्नैक्स खाना अलग बात है, लेकिन यदि ये रोजाना के भोजन का हिस्सा बन जाएं तो लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और घर का पौष्टिक भोजन ही बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास की मजबूत नींव है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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