लखनऊ, 17 जून। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में वायु प्रदूषण को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर के बाहरी क्षेत्रों में संचालित कुछ ईंट-भट्ठों से निकलने वाला धुआं, धूल और राख वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, प्रदूषण के लिए केवल ईंट-भट्ठों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य, सड़क की धूल, औद्योगिक गतिविधियां और खुले में कचरा जलाना भी प्रमुख कारण हैं।
सुबह और शाम के समय बढ़ती परेशानी
लखनऊ के बाहरी इलाकों तथा आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के समय हवा में धुएं और धूल की मात्रा अधिक महसूस होती है। कई लोगों ने आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और गले में खराश जैसी समस्याओं की शिकायत की है। चिकित्सकों का कहना है कि पहले से अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को ऐसे वातावरण में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
ईंट-भट्ठों के संचालन पर निगरानी की मांग
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि सभी ईंट-भट्ठों की नियमित जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वे निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रहे हैं। यदि किसी इकाई द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक ज़िग-ज़ैग (Zig-Zag) तकनीक वाले भट्ठों से पारंपरिक भट्ठों की तुलना में कम उत्सर्जन होता है। इसलिए सभी संचालकों को स्वीकृत एवं कम प्रदूषण वाली तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
किसानों और ग्रामीणों पर असर
ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ किसानों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक धूल और धुएं का स्तर अधिक रहता है, तो इसका असर आसपास की फसलों और मिट्टी की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। हालांकि, किसी विशेष क्षेत्र में वास्तविक प्रभाव का आकलन वैज्ञानिक जांच और पर्यावरणीय अध्ययन के आधार पर ही किया जा सकता है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) और जिला प्रशासन से मांग की है कि नियमित वायु गुणवत्ता की निगरानी, उत्सर्जन की जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जिन औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण नहीं हैं या मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि लखनऊ में वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल किसी एक क्षेत्र या उद्योग पर कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, खुले में कचरा जलाने पर रोक, हरित क्षेत्र का विस्तार और सभी उद्योगों द्वारा पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




