एवियन-ले-बैंस (फ्रांस), 17 जून 2026।
फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-ले-बैंस में आयोजित तीन दिवसीय G7 शिखर सम्मेलन (15-17 जून) का समापन कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर सहमति और रणनीतिक चर्चाओं के साथ हुआ। सम्मेलन में विश्व की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने वैश्विक आर्थिक स्थिरता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा सुरक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व की स्थिति तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
G7 में कौन-कौन शामिल है?
G7 समूह में सात प्रमुख विकसित देश शामिल हैं—
- अमेरिका
- फ्रांस
- ब्रिटेन
- जर्मनी
- इटली
- जापान
- कनाडा
इसके अलावा यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष प्रतिनिधि भी सम्मेलन में भाग लेते हैं। इस वर्ष फ्रांस ने G7 की अध्यक्षता की।
भारत की भागीदारी रही महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। भारत ने ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक दक्षिण (Global South), डिजिटल सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी जैसे विषयों पर अपना पक्ष मजबूती से रखा।
मोदी-ट्रंप मुलाकात रही चर्चा का केंद्र
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, वीजा नीति तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लाखों भारतीय नाविक (Seafarers) वैश्विक समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर एकजुटता
G7 नेताओं ने यूक्रेन के प्रति अपना समर्थन दोहराया और रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन में ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा, पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी चर्चा हुई।
AI पर बड़ा फैसला
इस बार सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) सबसे प्रमुख विषयों में रही। नेताओं ने सुरक्षित, जिम्मेदार और भरोसेमंद AI के विकास के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया।
G7 देशों ने उन्नत AI तकनीकों के उपयोग, साइबर सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता और उत्पादकता पर उनके प्रभाव का संयुक्त अध्ययन करने पर सहमति जताई। साथ ही “Trusted Partners” व्यवस्था पर भी चर्चा हुई, जिसके माध्यम से विश्वसनीय सहयोगी देशों के साथ उन्नत AI तकनीक साझा करने की योजना बनाई जा रही है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा
सम्मेलन में नेताओं ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता व्यक्त की।
संयुक्त बयान में G7 देशों ने विदेशी मुद्रा बाजारों में स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई तथा तेल आयात करने वाले देशों से पर्याप्त रणनीतिक भंडार बनाए रखने का आह्वान किया।
मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा
ईरान, इज़राइल और व्यापक मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति भी सम्मेलन का प्रमुख विषय रही। नेताओं ने क्षेत्र में तनाव कम करने, कूटनीतिक समाधान और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत के लिए क्या है महत्व?
विशेषज्ञों का मानना है कि G7 में भारत की लगातार भागीदारी यह दर्शाती है कि वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक निर्णयों में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, आपूर्ति श्रृंखला और AI सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




