चेन्नई, 6 जून 2026 – मद्रास उच्च न्यायालय ने लगभग 30 साल पुराने विवाद में फैसला सुनाते हुए सन टीवी नेटवर्क को अभिनेत्री आर. सुकन्या को 10,00,500 रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने वीरप्पन के उस इंटरव्यू के विवादित हिस्सों को आगे प्रसारित या प्रकाशित करने पर स्थायी रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति के. कुमारेश बाबू की एकलपीठ ने सन टीवी द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया और 2015 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। ट्रायल कोर्ट ने सुकन्या की मानहानि के मामले में यह हर्जाना तय किया था।
मामला क्या था?
1996 में सन टीवी पर ‘नेरुक्कु नेर’ (मुंहामुखी) कार्यक्रम के तहत वन्य अपराधी वीरप्पन का इंटरव्यू प्रसारित किया गया था, जिसे ‘नक्कीरन’ पत्रिका के संपादक आर.आर. गोपाल ने लिया था। इस इंटरव्यू में वीरप्पन ने सुकन्या के खिलाफ अपमानजनक और झूठे आरोप लगाए थे। उनमें पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के बेटे के साथ कथित अवैध संबंध और 1996 के आम चुनावों से जुड़े राजनीतिक सौदेबाजी का दावा शामिल था।
सुकन्या ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा बताते हुए कहा कि इससे उनकी प्रतिष्ठा, सम्मान और अभिनय करियर को गंभीर नुकसान पहुंचा। उन्होंने 1 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का दावा किया, लेकिन अदालत में 10,00,500 रुपये तक सीमित रखा।
अदालत का तर्क
- सन टीवी की जिम्मेदारी: अदालत ने कहा कि सन टीवी के पास इंटरव्यू को एडिट, कट, डिलीट या संशोधित करने का पूरा अधिकार था। इसलिए चैनल को सामग्री की सत्यता जांचनी चाहिए थी।
- मानहानि साबित: सुकन्या ने अपनी गवाही में प्रतिष्ठा के नुकसान का जिक्र किया, जिसे क्रॉस-एग्जामिनेशन में प्रभावी ढंग से चुनौती नहीं दी गई।
- माफी अपर्याप्त: चैनल ने केवल एक तीसरे पक्ष की तमिल पत्रिका में खेद व्यक्त किया, लेकिन अपने चैनल पर नहीं। अदालत ने इसे अपर्याप्त माना।
- व्यावसायिक लाभ: चैनल ने कार्यक्रम के दौरान विज्ञापनों से लाभ कमाया, इसलिए जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रसारक को सामग्री की जांच करने का कर्तव्य है, खासकर जब उसके पास संपादकीय नियंत्रण हो।
सुकन्या की प्रतिक्रिया
यह लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुकन्या की जीत है। उन्होंने 1996 में ही मुकदमा दायर किया था। 2015 में ट्रायल कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया था, जिसे अब उच्च न्यायालय ने पुष्टि कर दी।
नोट: नक्कीरन और वीरप्पन को मामले से मुक्त कर दिया गया था, क्योंकि इंटरव्यू सामग्री सन टीवी को दी गई थी और चैनल जिम्मेदार था।
यह फैसला मीडिया की जिम्मेदारी और मानहानि के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह दर्शाता है कि प्रसारकों को सामग्री प्रसारित करने से पहले उचित सत्यापन करना चाहिए।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




