न्यूयॉर्क/संयुक्त राष्ट्र, 8 अप्रैल 2026 — संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और वहां व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने संबंधी एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रूस और चीन के वीटो के कारण पास नहीं हो सका। यह प्रस्ताव बहरीन की ओर से पेश किया गया था और इसमें कई बार संशोधन किए गए थे, लेकिन फिर भी स्थायी सदस्यों ने इसे रोक दिया।
घटना का विवरण
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य देशों में से 11 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जबकि रूस और चीन ने विरोध में वोट डाला। पाकिस्तान और कोलंबिया ने मतदान से परहेज (abstain) किया। चूंकि रूस और चीन सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, उनके नकारात्मक वोट (वीटो) के कारण प्रस्ताव स्वतः असफल हो गया।
प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों को रोकने, नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और सदस्य देशों को समन्वय करके रक्षात्मक प्रयास करने की अपील की गई थी। शुरू में इसमें बल प्रयोग की अनुमति देने वाली भाषा भी थी, लेकिन रूस, चीन और फ्रांस के विरोध के बाद इसे कई बार कमजोर (watered-down) किया गया था।
रूस और चीन का तर्क
- दोनों देशों ने प्रस्ताव को ईरान के खिलाफ पक्षपाती बताया।
- रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंजिया ने कहा कि यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और शांति प्रयासों के लिए खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है।
- चीन ने भी इसे ईरान के विरुद्ध बताया और कहा कि इस तरह के प्रस्ताव से क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है।
पृष्ठभूमि
यह घटना अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच हुई, जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी जलडमरूमध्य से होता है। इसके बंद रहने से वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू गई थीं और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य खोलने के लिए समयसीमा दी थी। प्रस्ताव पर वोटिंग ट्रंप की उस डेडलाइन से ठीक पहले हुई।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी ने कहा कि प्रस्ताव के असफल होने से दुनिया को गलत संदेश गया है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर खतरा बिना किसी कार्रवाई के सहन किया जा सकता है।
- अमेरिका और खाड़ी देशों ने रूस-चीन के वीटो की निंदा की।
- कई विश्लेषकों का मानना है कि यह वीटो ईरान के प्रति रूस और चीन के समर्थन को दर्शाता है।
वीटो के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर तत्काल अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने का प्रयास विफल रहा। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर अनिश्चितता बनी हुई है, हालांकि बाद में अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो पावर के कारण महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्रवाई अक्सर रुक जाती है। यह मामला भी वैश्विक शक्ति संतुलन और स्थायी सदस्यों के हितों के टकराव को उजागर करता है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




