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ईरान के हमलों से अमेरिका को मध्य पूर्व युद्ध में 800 मिलियन डॉलर का भारी नुकसान, पहले दो हफ्तों में हुआ बड़ा नुकसान

मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध में अमेरिका को भारी आर्थिक झटका लगा है। एक नए विश्लेषण के अनुसार, ईरान के हमलों से अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को पहले दो हफ्तों में ही लगभग 800 मिलियन डॉलर (करीब 6,700 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा पहले बताए गए नुकसान से काफी ज्यादा है और युद्ध की बढ़ती लागत को दर्शाता है।

बीबीसी और सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की रिपोर्ट के अनुसार, यह नुकसान मुख्य रूप से ईरान के शुरुआती जवाबी हमलों में हुआ, जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। ईरान ने जॉर्डन, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसमें एयर-डिफेंस सिस्टम, रडार, इमारतें और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया।

प्रमुख नुकसान के आंकड़े:

  • कुल अनुमानित नुकसान: 800 मिलियन डॉलर (लगभग 6,700 करोड़ रुपये)।
  • एयर-डिफेंस और रडार सिस्टम: एक THAAD मिसाइल डिफेंस यूनिट से जुड़े रडार पर हमला अकेले सैकड़ों मिलियन डॉलर का नुकसान पहुंचाया।
  • अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर: इमारतें, सुविधाएं और अन्य ढांचे को अतिरिक्त 310 मिलियन डॉलर का नुकसान।
  • विमान और ड्रोन: 16 विमानों को नुकसान, जिसमें 12 MQ-9 Reaper ड्रोन (प्रत्येक 56.5 मिलियन डॉलर तक) शामिल।
  • कुल प्रभावित साइट्स: कम से कम 17 अमेरिकी सैन्य साइट्स क्षतिग्रस्त।

यह नुकसान अमेरिका की कुल युद्ध लागत का हिस्सा है, जो पहले 12 दिनों में ही 16.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध लंबा खिंचने पर लागत और बढ़ेगी, क्योंकि मरम्मत, नए हथियार और ऑपरेशंस की लागत अलग से जोड़ी जाएगी। ईरान के हमलों ने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम जैसे पैट्रियट और THAAD को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।

ट्रंप प्रशासन ने युद्ध को “त्वरित जीत” बताते हुए शुरू किया था, लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई ने अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को गंभीर चुनौती दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नुकसान पहले से ज्यादा होने से अमेरिका को क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने पड़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नुकसान अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर भारी बोझ डाल रहा है, जबकि वैश्विक स्तर पर तेल कीमतें बढ़ रही हैं और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। युद्ध अब चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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