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भारत ने बांग्लादेश को भेजा 5000 टन डीजल: पेट्रोलियम संकट के बीच पड़ोसी देश को सहायता, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती

नई दिल्ली, 10 मार्च 2026: मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक पेट्रोलियम संकट के बीच भारत ने मानवीय सहायता का बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय ने आज घोषणा की कि भारत ने बांग्लादेश को 5000 टन डीजल की आपातकालीन आपूर्ति भेजी है। यह सहायता बांग्लादेश के गंभीर ईंधन संकट को कम करने के लिए है, जहां पेट्रोलियम उत्पादों की कमी से परिवहन और उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत यह कदम न केवल पड़ोसी देश को राहत देगा, बल्कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को नई दिशा भी प्रदान करेगा।

संकट का वैश्विक परिदृश्य: बांग्लादेश पर गहरा असर

ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निर्यात रोकने की धमकी और सऊदी अरब-इराक द्वारा उत्पादन घटाने से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई है। भारत स्वयं एलपीजी और पेट्रोल की कमी से जूझ रहा है, जहां दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 105 रुपये प्रति लीटर को पार कर चुकी हैं। लेकिन बांग्लादेश की स्थिति और भी चिंताजनक है। दक्षिण एशियाई देश अपनी 90 प्रतिशत ऊर्जा जरूरत आयात पर निर्भर है, और मध्य पूर्व संकट ने उसके आयात मार्गों को बुरी तरह प्रभावित किया है।

ढाका में डीजल की कीमतें 120 टका प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे ट्रक, बसें और कृषि मशीनरी ठप हो गई हैं। बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था, जो पहले से ही बाढ़ और मुद्रास्फीति से परेशान है, अब ईंधन संकट से 2-3 प्रतिशत की विकास दर खो सकती है। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कल ही अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की थी, जिस पर भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “भारत हमेशा पड़ोसियों के साथ खड़ा रहता है। यह डीजल आपूर्ति बांग्लादेश के आम नागरिकों को राहत पहुंचाएगी।”

सहायता का विवरण: कैसे पहुंचेगा डीजल, क्या होगा असर

भारत ने भारतीय तेल निगम (IOC) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के सहयोग से 5000 टन उच्च गुणवत्ता वाला डीजल तैयार किया है। यह मात्रा बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह के रास्ते कल सुबह पहुंच जाएगी। कोलकाता से रवाना हुए जहाज ‘एमवी इंडियन ग्रेस’ पर लोड यह डीजल बांग्लादेश की दैनिक जरूरत का लगभग 10 प्रतिशत पूरा करेगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह सहायता व्यावसायिक नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर है, और कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री नसीर हुसैन ने भारत का आभार जताते हुए कहा, “यह सहायता हमारे लिए वरदान है। इससे परिवहन क्षेत्र पटरी पर लौटेगा और किसान अपनी फसल की कटाई समय पर कर सकेंगे।” ढाका में डीजल की कमी से सैकड़ों ट्रक ड्राइवर बेरोजगार हो चुके थे, और कई फैक्टरियां बंद पड़ी हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह आपूर्ति अगले 7-10 दिनों तक ढाका, चटगांव और सिलहट जैसे शहरों में राहत प्रदान करेगी।

भारत की यह पहल क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का हिस्सा है। 2025 में दोनों देशों ने ऊर्जा सहयोग पर समझौता किया था, जिसमें भारत बांग्लादेश को गैस और डीजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने का वादा करता है। वर्तमान संकट में भारत ने अपनी रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता (SPR) का इस्तेमाल कर यह व्यवस्था की है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि संकट के समय पड़ोसी देश अकेले न पड़े। भारत की क्षमता सभी के लिए है।”

द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय: कूटनीति की जीत

यह सहायता भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई ऊंचाई देगी। रोहिंग्या संकट और तीस्ता जल बंटवारे जैसे मुद्दों के बीच यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करेगा। शेख हसीना सरकार ने पहले ही भारत को ‘सर्वश्रेष्ठ मित्र’ घोषित किया है, और अब यह ऊर्जा सहयोग दोनों तरफ से मजबूत हो रहा है। बांग्लादेश ने जवाब में भारत को चावल और जूट उत्पादों की अतिरिक्त आपूर्ति का वादा किया है।

विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सराहना की, “मोदी सरकार का यह कदम सही दिशा में है, लेकिन घरेलू संकट को भी प्राथमिकता दें।” अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, संयुक्त राष्ट्र ने भारत की इस पहल की तारीफ की है, जो दक्षिण एशिया में सहयोग का उदाहरण बनेगी।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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