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ईरान युद्ध के साये में एलपीजी-पेट्रोल संकट: पीएम मोदी की उच्चस्तरीय बैठक, घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश

नई दिल्ली, 10 मार्च 2026: मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तेज होती जंग ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर संकट में डाल दिया है। एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत से लाखों घरों में खाना पकाने का संकट पैदा हो गया है, वहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल ने आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। इस आपात स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने, उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक आयात स्रोतों पर जोर दिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि संकट को नियंत्रित करने के लिए रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो महंगाई का ग्राफ और ऊंचा चढ़ सकता है।

संकट की जड़ें: मध्य पूर्व युद्ध का असर भारत पर

ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल और गैस की आपूर्ति बाधित कर दी है। भारत अपनी 85 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें ईरान और इराक जैसे देशों का बड़ा योगदान है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में क्षेत्रीय तेल निर्यात रोकने की धमकी दी है, जबकि सऊदी अरब और इराक ने उत्पादन घटा दिया है। परिणामस्वरूप, एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई चेन टूट गई है। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में घरेलू सिलेंडरों की डिलीवरी में 15-20 दिनों की देरी हो रही है।

व्यावसायिक क्षेत्र में तो हालात और बुरे हैं। मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु के होटल-रेस्तरां आग से चलने वाले उपकरणों पर निर्भर हैं, लेकिन कमर्शियल सिलेंडरों की कमी से कई प्रतिष्ठान बंद हो चुके हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 30 प्रतिशत से अधिक व्यावसायिक इकाइयां प्रभावित हुई हैं। पेट्रोलियम उत्पादों की बात करें तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 105 रुपये प्रति लीटर को पार कर गई है, जबकि डीजल 95 रुपये के ऊपर पहुंच गया। यह उछाल ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है, जहां लॉजिस्टिक्स लागत 20 प्रतिशत बढ़ चुकी है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। उन्होंने कहा, “एलपीजी की कमी से लाखों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। केंद्र को तत्काल कदम उठाने चाहिए।” इसी तरह, अन्य विपक्षी नेता भी सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

पीएम मोदी की बैठक: प्रमुख फैसले और रणनीतियां

प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, आज दोपहर बैठक में ऊर्जा संकट की समीक्षा की गई। पीएम मोदी ने पेट्रोलियम मंत्री पुरी को निर्देश दिए कि घरेलू एलपीजी वितरण को प्राथमिकता दी जाए। इसके तहत, तेल रिफाइनरियों को उत्पादन में 10 प्रतिशत की वृद्धि करने का आदेश दिया गया है। वर्तमान में, भारत की 70 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होर्मुज के बाहर से हो रही है, जिसे और बढ़ाया जाएगा।

विदेश मंत्री जयशंकर ने मध्य पूर्वी देशों के साथ कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा की। भारत ने सऊदी अरामको और अन्य वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाने के लिए समझौते तेज किए हैं। बैठक में गठित शिकायत निवारण समिति को सक्रिय करने का फैसला हुआ, जो उपभोक्ताओं की शिकायतों का तुरंत समाधान करेगी। इसके अलावा, रिजर्व स्टॉक का इस्तेमाल कर एलपीजी की कमी को पूरा करने की योजना पर मुहर लगी।

पुरी ने बैठक के बाद कहा, “सरकार संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। घरेलू उपभोक्ताओं को कोई असुविधा नहीं होने दी जाएगी। व्यावसायिक क्षेत्र के लिए वैकल्पिक ईंधन जैसे सीएनजी को बढ़ावा दिया जाएगा।” पीएम मोदी ने जोर दिया कि “आत्मनिर्भर भारत” के तहत घरेलू उत्पादन को मजबूत करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे संकटों से बचा जा सके।

प्रभावित क्षेत्रों में हाहाकार: ग्रामीण भारत सबसे ज्यादा प्रभावित

ग्रामीण इलाकों में स्थिति सबसे चिंताजनक है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में महिलाएं लकड़ी जलाकर खाना बना रही हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। एक सर्वे के मुताबिक, 40 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों ने एलपीजी की कमी के कारण पारंपरिक चूल्हों पर लौटना पड़ा है। पेट्रोल संकट से किसानों की ट्रैक्टर डीजल सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है।

शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम और कतारें आम हो गई हैं। दिल्ली-एनसीआर में पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनों के कारण हादसे भी बढ़े हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगर संकट एक महीना चला तो खुदरा महंगाई दर 2-3 प्रतिशत बढ़ सकती है।

भविष्य की राह: कूटनीति और आत्मनिर्भरता पर जोर

सरकार का कहना है कि कोई बड़ा संकट नहीं है, लेकिन विपक्ष इसे “नीतिगत विफलता” बता रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “मोदी सरकार की विदेश नीति की कमजोरी से आम आदमी भुगत रहा है।” दूसरी ओर, विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि भारत को रूस और अमेरिका जैसे देशों से अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।

लंबे समय में, नवीकरणीय ऊर्जा पर निवेश बढ़ाने की जरूरत है। पीएम मोदी ने बैठक में ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की। अगर युद्ध शीघ्र समाप्त हुआ तो संकट टल सकता है, लेकिन तब तक सरकार को सतर्क रहना होगा।

यह संकट भारत के लिए एक सबक है कि वैश्विक घटनाओं का असर घर-घर तक पहुंच सकता है। उम्मीद है कि पीएम की पहल से जल्द राहत मिलेगी और जीवन पटरी पर लौट आएगा।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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