नई दिल्ली, 13 जनवरी 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के गांधीनगर जिले के मानसा शहर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को भारत की सनातन धर्म, संस्कृति और लोगों की आस्था की मजबूती का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सदियों में कई बार नष्ट होने के बावजूद मंदिर आज भी उसी जगह पर खड़ा है, जबकि आक्रमणकारी इतिहास के पन्नों से मिट चुके हैं।
शाह ने कहा, “सोमनाथ मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। यह सनातन धर्म की अमरता का प्रमाण है, जैसे सूर्य की। आक्रमणकारी गायब हो गए, लेकिन मंदिर आज भी खड़ा है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ कॉरिडोर के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत की सभ्यता की निरंतरता को दर्शाता है।
इससे पहले, शाह ने गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (जीबीआरसी) के बीएसएल-4 बायोकंटेनमेंट फैसिलिटी की नींव रखी। इस अवसर पर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह सुविधा देश की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच बनेगी। उन्होंने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) को मानवता के लिए बड़ा खतरा बताते हुए विशेषज्ञों से इसके खिलाफ एक व्यापक रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया।
शाह ने कहा, “अमृत काल में भारत को ऊंचाइयों पर ले जाने की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है। यह बीएसएल-4 लैब पुणे के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी सुविधा होगी, जो बायोटेक क्षेत्र में गुजरात को शीर्ष स्थान दिलाएगी।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि का जिक्र करते हुए कहा कि विज्ञान और तकनीक को केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि यह राष्ट्र के समग्र विकास का मजबूत स्तंभ बनना चाहिए।
गृह मंत्री ने मानसा नगरपालिका में 267 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि एएमआर एक ‘साइलेंट डिजास्टर’ है, और इसके खिलाफ दवा साक्षरता, अनुसंधान और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
शाह की गुजरात यात्रा के दौरान इन भाषणों ने स्वास्थ्य सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत और विकास पर जोर दिया, जो मोदी सरकार की प्राथमिकताओं को प्रतिबिंबित करते हैं। यह घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संरक्षण के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती हैं।
Author: saryusandhyanews
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