जम्मू, 7 जनवरी 2026: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने जम्मू के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (एसएमवीडीआईएमई) की एमबीबीएस कोर्स की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। यह फैसला कॉलेज द्वारा न्यूनतम मानकों का पालन न करने के कारण लिया गया है, जिसमें गंभीर कमियां पाई गईं। कॉलेज रियासी के ककरयाल में स्थित है और यह श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित है।
एनएमसी की मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने 6 जनवरी 2026 को जारी एक आदेश में कहा कि 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के लिए 50 एमबीबीएस सीटों के लिए दी गई अनुमति पत्र (एलओपी) वापस ले ली गई है। आयोग ने आश्चर्यजनक निरीक्षण के दौरान कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं, फैकल्टी और अन्य मानकों में भारी कमी पाई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, और वर्तमान छात्रों को संघ शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा।
यह विवाद हाल ही में तब और बढ़ गया जब कॉलेज के पहले बैच में 50 में से 42 छात्र कश्मीरी मुस्लिम थे, और एक सिख छात्र था। इस प्रवेश सूची पर राजनीतिक हंगामा मचा, और कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एनएमसी के इस कदम का स्वागत किया है। बीजेपी नेता रविंदर रैना ने कहा, “यह फैसला गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था।” वहीं, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने छात्रों के स्थानांतरण की मांग की है।
कॉलेज की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, वे एनएमसी के फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला मेडिकल शिक्षा में मानकों की सख्ती को दर्शाता है, जहां किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह घटना जम्मू-कश्मीर में मेडिकल शिक्षा के लिए एक बड़ा झटका है, और इससे प्रभावित छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि छात्रों को बिना किसी देरी के अन्य संस्थानों में समायोजित किया जाएगा।
Author: saryusandhyanews
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