ढाका, 28 दिसंबर 2025: बांग्लादेश के मायमेन्सिंह जिले के भालुका इलाके में 18 दिसंबर को हुई एक हृदयविदारक घटना ने अल्पसंख्यक समुदायों के बीच दहशत पैदा कर दी है। 29 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को एक मुस्लिम भीड़ ने कथित वसूली के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला, उसके शव को 1 किलोमीटर तक घसीटा, पेड़ से लटका दिया और फिर आग लगा दी। घटनास्थल पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने एनडीटीवी को दिए बयान में कहा, “भीड़ ने तो शैतानों की तरह व्यवहार किया।” यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का एक और उदाहरण है, जिसकी निंदा भारत समेत विश्व स्तर पर हो रही है।
घटना का विवरण: कारखाने से सड़क तक का क्रूर सफर
घटना 18 दिसंबर की शाम को भालुका के एक कारखाने के बाहर शुरू हुई। दीपू चंद्र दास, जो स्थानीय एक फैक्ट्री में मजदूर के रूप में काम करता था, पर वसूली (एक्सटॉर्शन) का आरोप लगा। गुस्साई भीड़ ने उसे कारखाने से बाहर घसीट लिया और लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, दीपू को बाहर निकालते ही भीड़ ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। “उन्होंने उसे इतना पीटा कि वह तड़पने लगा, फिर शव को कम से कम 1 किलोमीटर तक सड़क पर घसीटा,” प्रत्यक्षदर्शी ने बताया। इसके बाद भीड़ ने उसके शव को एक पेड़ से लटका दिया और जिंदा जलाने की कोशिश की।
विकिपीडिया के अनुसार, दीपू को पहले पीटा गया, फिर पेड़ से लटकाया गया और अंत में आग के हवाले कर दिया गया। यह घटना असम सीमा से महज 100 किलोमीटर दूर हुई, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ गया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट में बताया गया कि जांचकर्ताओं ने पुष्टि की है कि दीपू का शव घसीटा गया था।
प्रत्यक्षदर्शी का चैनलिंग बयान: “शैतानों जैसी भीड़”
घटना के एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में विस्तार से बताया, “भीड़ ने शैतानों की तरह व्यवहार किया। उन्होंने शव को 1 किमी घसीटा।” यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जहां फेसबुक और इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा किए जा रहे हैं। एक वीडियो में दीपू को भीड़ द्वारा ले जाते हुए दिखाया गया है, जो उसके अंतिम क्षणों को दर्शाता है। प्रत्यक्षदर्शी ने यह भी कहा कि कारखाने के बाहर हुई पिटाई इतनी क्रूर थी कि आसपास के लोग डर के मारे चुप रहे।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले: एक और हादसा
यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती श्रृंखला का हिस्सा है। मात्र दो दिन पहले, 26 दिसंबर को राजबाड़ी जिले में एक अन्य हिंदू युवक अमृत मंडल को भी भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। स्टेट्समैन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमृत पर भी वसूली का झूठा आरोप लगाया गया था। इंस्टाग्राम पर साझा एक पोस्ट में कहा गया कि राजबाड़ी में यह दूसरी ऐसी घटना है।
बांग्लादेश में हाल के राजनीतिक उथल-पुथल के बाद अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले बढ़े हैं। भारत सरकार ने इसकी कड़ी निंदा की है और बांग्लादेशी अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। मनीकंट्रोल की एक पोस्ट में प्रत्यक्षदर्शी के बयान को हाइलाइट करते हुए अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर चिंता जताई गई।
प्रतिक्रियाएं और भविष्य की आशंका
भारतीय बुद्धिजीवियों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना की निंदा की है। पूर्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट किया, “अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पड़ोसी देश की जिम्मेदारी है।” बांग्लादेश पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन परिवार का आरोप है कि दोषियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया।
यह घटना न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती है, बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा भी पैदा करती है। जैसे-जैसे 2026 नजदीक आ रहा है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बांग्लादेश में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी। दीपू चंद्र दास की मौत एक सवाल छोड़ जाती है—कब तक ऐसी क्रूरता बर्दाश्त होगी?
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




