अयोध्या (उत्तर प्रदेश), 28 दिसंबर 2025: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर का दर्शन किया और राम लला के चरणों में विशेष पूजा-अर्चना की। राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी वर्षगांठ पर यह यात्रा विशेष महत्व रखती है। नायडू दक्षिण भारत के पहले मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने राम मंदिर का यह दर्शन किया। उन्होंने मंदिर के भव्य स्वरूप की सराहना की और ‘राम राज्य’ को अच्छे शासन का आदर्श मॉडल करार दिया।
दर्शन यात्रा: तीन घंटे का आध्यात्मिक प्रवास
मुख्यमंत्री नायडू सुबह करीब 11:30 बजे मंदिर पहुंचे और लगभग तीन घंटे तक परिसर में रहे। इस दौरान उन्होंने राम लला की मूर्ति के दर्शन किए, पूजा की और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों से भेंट की। मंदिर के महंतों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। नायडू ने मंदिर निर्माण के लिए हुए कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
अपने इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए नायडू ने लिखा, “आज मुझे दिव्य और भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन और पूजा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भगवान राम के आदर्शों से प्रेरित होकर हम अपने राज्य में विकास और कल्याण की दिशा में कार्य कर रहे हैं।”
‘राम राज्य’ शासन का बेंचमार्क: नायडू का संदेश
मंदिर परिसर में पत्रकारों से बातचीत में चंद्रबाबू नायडू ने कहा, “राम राज्य किसी भी सरकार के लिए बेंचमार्क है। भगवान राम के मूल्य—सत्य, न्याय, सेवा और समानता—हमारे शासन का आधार हैं। आंध्र प्रदेश में हम इसी से प्रेरित होकर विकास कार्यों को गति दे रहे हैं।” उन्होंने अयोध्या के विकास को भी सराहा और कहा कि यह पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में भारत की पहचान को मजबूत कर रहा है।
नायडू की यह यात्रा आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सांस्कृतिक एवं विकासात्मक सहयोग को मजबूत करने का संकेत देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत से इस तरह के उच्च स्तरीय दर्शन से राम मंदिर का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ेगा।
ऐतिहासिक महत्व: दक्षिण भारत का पहला कदम
यह यात्रा नायडू के राजनीतिक सफर में एक मील का पत्थर साबित हुई। वे सात वर्षों में पहली बार अयोध्या पहुंचे और दक्षिण भारत के पहले मुख्यमंत्री के रूप में राम मंदिर दर्शन करने वाले बने। इससे पहले, नायडू ने कई मौकों पर रामायण के मूल्यों का उल्लेख किया था, लेकिन यह प्रत्यक्ष दर्शन उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अयोध्या प्रशासन ने इस अवसर पर विशेष सुरक्षा और स्वागत व्यवस्था की थी। नायडू के दर्शन के बाद वे आंध्र प्रदेश लौटने के लिए रवाना हो गए। यह घटना न केवल धार्मिक एकता का प्रतीक है, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संदेश को भी मजबूत करती है।
जैसे-जैसे 2026 की ओर बढ़ते हैं, ऐसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान भारत की एकता को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




