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राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमु ने की INS वाघशीर पर ऐतिहासिक डाइव सॉर्टी: नौसेना की शक्ति का प्रत्यक्ष अनुभव

करवार (कर्नाटक), 28 दिसंबर 2025: भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमु ने रविवार को कर्नाटक के करवार नौसेना अड्डे पर भारतीय नौसेना के स्वदेशी पनडुब्बी INS वाघशीर पर एक ऐतिहासिक डाइव सॉर्टी (समुद्री गश्त) की। यह यात्रा न केवल राष्ट्रपति के रूप में उनकी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि भारतीय नौसेना की उन्नत क्षमताओं का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है। राष्ट्रपति मुरमु इस उपलब्धि को हासिल करने वाली दूसरी राष्ट्रपति बनीं, जिन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के बाद (फरवरी 2006 में) पनडुब्बी पर सॉर्टी का अनुभव लिया।

यात्रा का विवरण: नौसेना वर्दी में उत्साहपूर्ण प्रस्थान

राष्ट्रपति मुरमु ने करवार नौसेना अड्डे पर पहुंचने के बाद नौसेना की वर्दी धारण की और नौसैनिकों को उत्साह से अभिवादन किया। उन्होंने नाविकों के सम्मान में हाथ हिलाकर अभिवादन किया, जो इस ऐतिहासिक क्षण की गर्मजोशी को दर्शाता है। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी उनके साथ इस सॉर्टी में मौजूद रहे। पनडुब्बी INS वाघशीर पर सवार होकर राष्ट्रपति ने समुद्र में गश्त की, जिसमें डाइविंग प्रक्रिया का भी अनुभव लिया गया। यह सॉर्टी भारतीय महासागर क्षेत्र में नौसेना की रणनीतिक सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है।

राष्ट्रपति का यह दौरा 27 से 30 दिसंबर तक गोवा, कर्नाटक और झारखंड की चार दिवसीय यात्रा का हिस्सा है। गोवा में पहुंचने के बाद वे कर्नाटक पहुंचीं, जहां यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, यह यात्रा नौसेना की क्षमताओं को मजबूत करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

INS वाघशीर: स्वदेशी तकनीक का प्रतीक

INS वाघशीर ‘कलवरी क्लास’ (स्कॉर्पीन प्रोजेक्ट) की छठी और अंतिम पनडुब्बी है, जिसे जनवरी 2025 में नौसेना में कमीशन किया गया। यह दुनिया की सबसे शांत और बहुमुखी डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों में से एक है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • मिशन क्षमताएं: एंटी-सर्फेस वारफेयर, एंटी-सबमरीन वारफेयर, खुफिया संग्रह, क्षेत्र निगरानी और विशेष अभियानों के लिए डिजाइन की गई।
  • हथियार प्रणाली: वायर-गाइडेड टॉरपीडो, एंटी-शिप मिसाइलें, उन्नत सोनार सिस्टम।
  • भविष्योन्मुखी डिजाइन: मॉड्यूलर निर्माण के कारण भविष्य में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक का एकीकरण संभव, जो पनडुब्बी की गतिशीलता बढ़ाएगी।

यह पनडुब्बी ‘मेक इन इंडिया’ पहल का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भारत की रक्षा स्वावलंबन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुई है। करवार नौसेना अड्डे को भारतीय महासागर क्षेत्र में लंबी अवधि की सुरक्षा हितों के लिए विकसित किया जा रहा है, जहां INS वाघशीर जैसी पनडुब्बियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

ऐतिहासिक महत्व: राष्ट्रपति की नौसेना के प्रति प्रतिबद्धता

राष्ट्रपति मुरमु

की यह सॉर्टी न केवल एक प्रतीकात्मक कदम है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे उच्च पदाधिकारी भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताओं का सीधा अनुभव ले रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति कलाम के बाद यह दूसरा अवसर है जब कोई राष्ट्रपति पनडुब्बी पर उतरकर समुद्री गहराइयों का जायजा ले रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना युवाओं को नौसेना में करियर चुनने के लिए प्रेरित करेगी और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाएगी।

 

राष्ट्रपति मुरमु ने इस अवसर पर नौसैनिकों की सराहना की और कहा कि भारतीय नौसेना की स्वदेशी तकनीकें देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाएंगी। उन्होंने युवा अधिकारियों से आह्वान किया कि वे ऐसे नवाचारों में योगदान दें, जो भारत को वैश्विक शक्ति बनाएं।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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