नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2025 – भारत की प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी ने आज विजय दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में ‘परम वीर धरहरा’ नामक नई गैलरी का उद्घाटन किया। यह गैलरी परम वीर चक्र से सम्मानित 21 वीर सैनिकों के चित्रों, जीवनियों और उनके शौर्यपूर्ण योगदानों को प्रदर्शित करती है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में विजय की 54वीं वर्षगांठ पर यह उद्घाटन न केवल सैनिकों के बलिदान को श्रद्धांजलि है, बल्कि युवा पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा प्रदान करने का माध्यम भी बनेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह ने राष्ट्रपति भवन को एक नया ऐतिहासिक आयाम प्रदान कर दिया।
उद्घाटन समारोह: भावुक क्षण और राष्ट्रगान
राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित भव्य समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई। राष्ट्रपति ने गैलरी का उद्घाटन करते हुए कहा, “ये वीर सैनिक न केवल सीमाओं के रक्षक थे, बल्कि वे राष्ट्र की आत्मा के प्रतीक हैं। ‘परम वीर धरहरा’ उनके शौर्य को जीवंत रखेगा और आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान की याद दिलाएगा।” समारोह में परम वीर चक्र विजेताओं के परिवारजन भी आमंत्रित थे, जिन्होंने राष्ट्रपति के समक्ष अपने परिजनों की वीर गाथाएं साझा कीं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन के दौरान राष्ट्रपति की प्रशंसा की और कहा, “यह गैलरी भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास का एक जीवंत दस्तावेज है। विजय दिवस पर यह उद्घाटन हमारे सशस्त्र बलों के मनोबल को और मजबूत करेगा।” समारोह में सेना के उच्चाधिकारियों, पूर्व सैनिकों और स्कूली बच्चों ने भाग लिया, जो गैलरी का अवलोकन करने के बाद राष्ट्रपति से मुलाकात भी की।
‘परम वीर धरहरा’ का स्वरूप और महत्व
‘परम वीर धरहरा’ राष्ट्रपति भवन के सर्कुलर हॉल में स्थित है, जो अब एक समर्पित सैन्य इतिहास संग्रहालय के रूप में विकसित हो गया है। इस गैलरी में 21 परम वीर चक्र प्राप्तकर्ताओं के बड़े-बड़े चित्र प्रदर्शित हैं, जिनमें मेजर सोमनाथ शर्मा, कर्नल अब्दुल हमीद, फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों जैसे वीरों की कहानियां वीडियो, फोटो और आर्टिफैक्ट्स के माध्यम से बयां की गई हैं। गैलरी का डिजाइन पारंपरिक भारतीय वास्तुकला पर आधारित है, जिसमें लाइट एंड साउंड शो भी शामिल है, जो युद्ध के मैदान पर इन वीरों के शौर्य को जीवंत करता है।
यह परियोजना राष्ट्रपति भवन के ‘राष्ट्रपति भवन संग्रहालय’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय इतिहास के विभिन्न पहलुओं को जन-जन तक पहुंचाना है। राष्ट्रपति , जो स्वयं आदिवासी समुदाय से आती हैं, ने इस गैलरी को “राष्ट्र की एकता का प्रतीक” बताया, क्योंकि परम वीर चक्र विजेताओं में विभिन्न जाति, धर्म और क्षेत्रों के सैनिक शामिल हैं। गैलरी के माध्यम से आगंतुक इन वीरों के निजी पत्र, पुरस्कार और युद्ध-संबंधी दस्तावेज देख सकेंगे।
विजय दिवस के संदर्भ में यह उद्घाटन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। 16 दिसंबर 1971 को भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) को मुक्ति दिलाने वाले युद्ध में ऐतिहासिक विजय प्राप्त की थी। राष्ट्रपति ने समारोह में 1971 युद्ध के नायकों को नमन किया और कहा, “यह विजय न केवल सैन्य सफलता थी, बल्कि मानवीय मूल्यों की जीत भी थी।”
राष्ट्रपति मुरmu का सैन्य इतिहास से जुड़ाव
राष्ट्रपति द्रौपदी का यह उद्घाटन उनके कार्यकाल में सैन्य सम्मान को बढ़ावा देने की कई पहलों में से एक है। पिछले वर्षों में उन्होंने कई सैन्य अकादमियों का दौरा किया है और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए विशेष योजनाओं का शुभारंभ किया है। आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाली राष्ट्रपति ने गैलरी उद्घाटन के दौरान आदिवासी सैनिकों के योगदान पर भी प्रकाश डाला, जैसे कि परम वीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का, जो गारो समुदाय से थे।
इसके अलावा, राष्ट्रपति भवन ने घोषणा की कि ‘परम वीर धरहरा’ अब पर्यटकों और स्कूलों के लिए नि:शुल्क खुली रहेगी, ताकि राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रोत्साहन मिले। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, पहले ही दिन सैकड़ों आगंतुकों ने गैलरी का दौरा किया।
व्यापक प्रभाव: युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत
यह गैलरी न केवल सैन्य इतिहास को संरक्षित करेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा जागरूकता को भी बढ़ाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संग्रहालय युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करेंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ट्वीट कर कहा, “राष्ट्रपति का यह कदम भारतीय सेना के गौरव को अमर बनाएगा।”
‘परम वीर धरहरा’ का उद्घाटन विजय दिवस को और भी यादगार बना देगा। राष्ट्रपति ने समापन में सभी सैनिकों को सलाम ठोकते हुए कहा, “भारत माता की जय!” यह आयोजन भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और सैन्य परंपराओं के सम्मान का प्रतीक बन गया।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




