नई दिल्ली, 12 दिसंबर 2025 (संवाददाता): दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और टेस्ला-स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने भारत के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। स्टारलिंक के माध्यम से देश की ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने को लेकर मस्क उत्साहित नजर आ रहे हैं। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ हालिया बैठक के बाद मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया, “स्टारलिंक के साथ भारत की सेवा करने को उत्सुक!” यह बयान भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग की उम्मीदों को और मजबूत कर रहा है।
मस्क का यह ट्वीट 10 दिसंबर को आया, जब स्टारलिंक की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रेयर और कंपनी की वरिष्ठ टीम ने नई दिल्ली में मंत्री सिंधिया से मुलाकात की। बैठक में सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट के जरिए ‘लास्ट-माइल’ कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन को मजबूत करने का हिस्सा है। सिंधिया ने अपनी पोस्ट में कहा, “स्टारलिंक टीम के साथ मिलकर भारत के हर कोने तक इंटरनेट पहुंचाने की योजना पर चर्चा हुई। यह ग्रामीण विकास को गति देगा।”
स्टारलिंक का भारत में सफर: चुनौतियां और अवसर
स्टारलिंक, स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा, लंबे समय से भारत में प्रवेश की कोशिश कर रही है। 2021 से लाइसेंसिंग और स्पेक्ट्रम आवंटन की मंजूरी का इंतजार था, लेकिन हाल के नीतिगत बदलावों के बाद रास्ता साफ होता दिख रहा है। सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन को आसान बनाने के लिए नए नियम बनाए हैं, जो विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर रहे हैं। मस्क ने कहा कि स्टारलिंक न केवल शहरी क्षेत्रों बल्कि पहाड़ी, जंगली और ग्रामीण इलाकों में भी तेज और सस्ती इंटरनेट सेवा प्रदान करेगा।
भारत में इंटरनेट पहुंच की स्थिति चिंताजनक है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 30% से कम आबादी को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड मिल पाता है। स्टारलिंक जैसी तकनीक से यह आंकड़ा दोगुना हो सकता है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और ई-कॉमर्स को बढ़ावा देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सेवा किसानों को मौसम पूर्वानुमान और बाजार जानकारी उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाएगी।
मस्क की भारत रुचि: टेस्ला से स्टारलिंक तक
एलन मस्क की भारत के प्रति दिलचस्पी नई नहीं है। टेस्ला ने 2023 में भारत में फैक्टरी लगाने की योजना जताई थी, लेकिन आयात शुल्क की वजह से देरी हुई। अब स्टारलिंक पर फोकस है, जो अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में सफल रहा है। मस्क ने हाल ही में केन्या में स्टारलिंक के 19,000 से अधिक उपयोगकर्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह सेवा गरीबी उन्मूलन में एनजीओ से भी ज्यादा प्रभावी साबित हो रही है। भारत के 1.4 अरब लोगों के बाजार को देखते हुए, स्टारलिंक यहां तेजी से विस्तार कर सकता है।
मंत्री सिंधिया ने कहा, “डिजिटल समावेशन भारत के विकास का आधार है। स्टारलिंक जैसी तकनीक से हम हर नागरिक को जोड़ेंगे।” मस्क की प्रतिक्रिया ने निवेशकों में उत्साह भर दिया है, और स्टॉक मार्केट में स्पेसएक्स से जुड़ी कंपनियों में हलचल दिखी।
भविष्य की संभावनाएं
अगले कुछ महीनों में लाइसेंस मंजूरी की उम्मीद है, जिसके बाद स्टारलिंक भारत में बीटा टेस्टिंग शुरू कर सकता है। सरकार और स्पेसएक्स के बीच स्पेक्ट्रम शेयरिंग और सुरक्षा मुद्दों पर और चर्चा होगी। यदि सब ठीक रहा, तो 2026 तक स्टारलिंक भारत के 50% ग्रामीण क्षेत्रों को कवर कर सकता है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




