कोच्चि, केरल, 8 दिसंबर 2025: केरल के कोच्चि में एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशन कोर्ट ने 2017 के सनसनीखेज अभिनेत्री अपहरण और यौन हमला मामले में मलयालम अभिनेता दिलीप (पी गोपालकृष्णन पड्मनाभन) को बरी कर दिया है। दिलीप, जो मामले में आठवें आरोपी के रूप में नामित थे, को साजिश रचने के आरोपों को साबित न कर पाने के कारण क्लीन चिट मिल गई। हालांकि, मुख्य आरोपी ‘पल्सर सुनी’ सहित छह अन्य को गैंग रेप और साजिश के दोषी ठहराया गया है। इस फैसले ने मलयालम सिनेमा जगत में हलचल मचा दी है, जहां दिलीप के प्रशंसकों ने कोर्ट के बाहर जश्न मनाया।
2017 का काला अध्याय: अभिनेत्री पर हमला
यह मामला 29 फरवरी 2017 का है, जब एक प्रमुख मलयालम अभिनेत्री को भोपाल से कोच्चि लौटते समय अपहरण कर लिया गया था। हमलावरों ने उनकी कार को रोका, उन्हें एक वैन में बंद कर लिया और घंटों तक यौन शोषण किया। हमले की पूरी घटना को वीडियो रिकॉर्ड किया गया, जो बाद में ब्लैकमेल के लिए इस्तेमाल होने वाला था। पुलिस ने जांच में पाया कि यह ‘कोटेशन रेप’ का पहला मामला था, जहां किसी ने पैसे देकर हमला करवाया।
मामले में नौ आरोपी बनाए गए थे। मुख्य आरोपी सुनीराज उर्फ ‘पल्सर सुनी’ (आरोपी नंबर 1) को रेप का दोषी पाया गया। अन्य पांच सह-आरोपियों को भी अपहरण, हमला और साजिश के आरोपों में सजा सुनाई गई। विशेष जज हनी एम वर्गीज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दिलीप के खिलाफ साजिश (धारा 120बी) साबित नहीं हो सकी। दिलीप पर सबूतों के साथ छेड़छाड़, गवाहों को प्रभावित करने और हमले के वीडियो रखने के आरोप भी लगे थे, लेकिन कोर्ट ने इन्हें खारिज कर दिया।
दिलीप का पहला बयान: ‘झूठी कहानी गढ़ी गई’
कोर्ट से बाहर निकलते ही दिलीप ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “यह सच्ची साजिश थी मुझे फंसाने की। मेरे करियर को बर्बाद करने और मेरी छवि खराब करने का प्रयास किया गया। पुलिस ने झूठी कहानी गढ़ी।” दिलीप ने करोड़ों प्रशंसकों का आभार जताया जो उनके लिए प्रार्थना करते रहे। उन्होंने अपने वकील रामन पिल्लई को भी धन्यवाद दिया। दिलीप ने कहा, “मैं निर्दोष हूं और न्याय की जीत हुई है।”
दिलीप की गिरफ्तारी 2017 में हुई थी, जब जांच में उनका नाम सामने आया। उन्हें 2018 में जमानत मिली, लेकिन मुकदमे के दौरान कई विवाद हुए, जिसमें गवाहों के पलटने और सबूतों की कमी शामिल थी। कोर्ट ने पाया कि 28 गवाहों ने अभियोजन पक्ष का साथ नहीं दिया।
विवाद और सिनेमा जगत पर असर
फैसले के बाद सोशल मीडिया पर दो गुट बंट गए। दिलीप के प्रशंसकों ने ‘न्याय की जीत’ का नारा लगाया, जबकि महिला अधिकार संगठनों और #MeToo समर्थकों ने फैसले पर सवाल उठाए। विपक्षी नेता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह फैसला पीड़ित को न्याय से वंचित करता है। केरल सरकार ने फैसले पर उच्च न्यायालय में अपील करने का ऐलान किया है।
यह मामला मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने #MeToo आंदोलन को जन्म दिया। कई अभिनेत्रियों ने उद्योग में यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त कानून और जांच प्रक्रिया की जरूरत है ताकि ऐसे मामले दोबारा न हों।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




