नई दिल्ली, 5 नवंबर 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सिरो-मालाबार चर्च के वरिष्ठ बिशपों के एक प्रतिनिधिमंडल से गहन चर्चा की। यह बैठक चर्च और ईसाई समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर केंद्रित रही, जहां पीएम ने पूर्ण सहयोग का वादा किया। चर्च के प्रमुख आर्कबिशप हिज बिट्यूड मार राफेल थट्टिल के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा था, और बैठक में यूनियन मिनिस्टर जॉर्ज कुरियन, भाजपा राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।
बैठक में चर्च प्रतिनिधियों ने अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक मुद्दों पर पीएम का ध्यान आकृष्ट कराया। प्रधानमंत्री ने चर्च नेताओं को संबोधित करते हुए कहा, “मैं हमेशा आपकी सेवा में हूं।” यह बयान चर्च समुदाय के बीच उत्साह का संचार कर गया। सूत्रों के अनुसार, चर्च ने छत्तीसगढ़ में पादरियों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया, हालांकि भाजपा ने स्पष्ट किया कि इस पर कोई विशिष्ट चर्चा नहीं हुई।
चर्च और सरकार के बीच मजबूत संवाद: एक नई शुरुआत
सिरो-मालाबार चर्च, जो भारत की सबसे पुरानी ईसाई संप्रदायों में से एक है, केरल में अपनी जड़ें जमाए हुए है। यह चर्च लाखों अनुयायियों के साथ देश की धार्मिक विविधता का प्रतीक है। आज की बैठक को भाजपा की ईसाई समुदाय के प्रति पहुंच के रूप में देखा जा रहा है, खासकर केरल में जहां चर्च का प्रभावशाली स्थान है। चर्च ने हाल ही में केरल में ‘सिर’ अभियान में पूर्ण सहयोग का निर्देश जारी किया था, जो सरकारी योजनाओं से जुड़ा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में कहा कि यह “एक शानदार संवाद” था, जिसमें चर्च प्रमुख मार राफेल थट्टिल के साथ गर्मजोशी भरी बातचीत हुई। चर्च के एक प्रवक्ता ने बताया, “पीएम ने हमारी चिंताओं को गंभीरता से सुना और सरकार की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।” यह बैठक दिल्ली में हुई, जहां प्रतिनिधिमंडल ने पहले केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन से भी मुलाकात की थी।
पृष्ठभूमि: अल्पसंख्यक मुद्दों पर चर्चा का महत्व
भारत में ईसाई समुदाय, जो कुल आबादी का लगभग 2.3 प्रतिशत है, विभिन्न राज्यों में सामाजिक और धार्मिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। छत्तीसगढ़ में भाजपा शासित क्षेत्रों में पादरियों के प्रवेश पर लगाए गए बोर्डों की चर्चा के एक दिन बाद यह बैठक हुई, जिसकी चर्च ने आलोचना की थी। हालांकि, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि सरकार धार्मिक सद्भाव और कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देगी।
भाजपा के एक नेता ने कहा, “यह बैठक समावेशी विकास की दिशा में एक कदम है। पीएम का दृष्टिकोण हमेशा सभी समुदायों को जोड़ने का रहा है।” सोशल मीडिया पर भी यह खबर ट्रेंड कर रही है, जहां #PMMeetsSyroMalabarChurch हैशटैग के साथ सैकड़ों पोस्ट्स आ रहे हैं।
आगे की राह: सहयोग और विकास
यह बैठक सिरो-मालाबार चर्च और केंद्र सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करने का संकेत देती है। चर्च ने सरकारी योजनाओं में सक्रिय भागीदारी का आश्वासन दिया, जबकि पीएम ने समुदाय के कल्याण के लिए विशेष पहल का वादा किया। आने वाले दिनों में ऐसे और संवाद की उम्मीद है, जो धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देगा।
पीएम मोदी की यह पहल एक बार फिर साबित करती है कि भारत की विविधता में एकता ही ताकत है। चर्च समुदाय ने इस भेंट को “ऐतिहासिक” करार दिया है, और उम्मीद है कि इससे अल्पसंख्यक कल्याण में नई गति आएगी।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




