Saryu Sandhya News

महाराष्ट्र के अगले डीजीपी के लिए 7 आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजी: सादानंद दाते प्रमुख दावेदार, दिसंबर में रिटायर होंगी रश्मि शुक्ला

मुंबई, 3 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता): महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष पद पर बदलाव की घड़ी करीब आ रही है। वर्तमान डीजीपी रश्मि शुक्ला के 31 दिसंबर को रिटायर होने के साथ राज्य गृह विभाग ने उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है। रविवार को गृह विभाग ने सात वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेज दी, जिनमें से यूपीएससी तीन नामों का पैनल तैयार करेगी। इनमें से एक को महाराष्ट्र का अगला डीजीपी बनाया जाएगा। इस सूची में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के निदेशक सादानंद दाते सबसे वरिष्ठ और मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहे हैं।

यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें डीजीपी की नियुक्ति के लिए वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और अनुभव के आधार पर पैनल तैयार किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, यूपीएससी जल्द ही तीन नामों का चयन कर राज्य सरकार को सौंप देगी, और अंतिम फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार लेगी। यह नियुक्ति न्यूनतम दो वर्ष के कार्यकाल के साथ होगी, जो राज्य की कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सात दावेदारों में सादानंद दाते का दबदबा

सूची में शामिल सात आईपीएस अधिकारियों में सादानंद दाते (1990 बैच) सबसे वरिष्ठ हैं। 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के दौरान अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध दाते वर्तमान में एनआईए के निदेशक हैं। उन्होंने सीएसटी स्टेशन पर हमलावरों का डटकर मुकाबला किया था, जिसके लिए उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। दाते की रिटायरमेंट दिसंबर 2026 में है, जो उन्हें डीजीपी के रूप में दो वर्ष का कार्यकाल देने की सुविधा देगी। पुलिस महकमे में उनकी लोकप्रियता और केंद्रीय एजेंसी में अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाते हैं।

अन्य अधिकारियों में 1990 बैच के ही अशोक कुमार उपाध्याय का नाम शामिल है, जो वर्तमान में महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) हैं। 1991 बैच के विवेक फरास, जो मुंबई पुलिस कमिश्नर रह चुके हैं, भी सूची में हैं। इसके अलावा, 1992 बैच के संजय कुमार बारवे (वर्तमान में डीजी, राज्य सशस्त्र पुलिस बल), 1993 बैच के प्रमोद जोग (डीजी, साइबर) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी जैसे राजेंद्रकुमार (1990 बैच, पूर्व डीजी) और एक अन्य नाम शामिल हैं। ये सभी अधिकारी 30 वर्ष से अधिक की सेवा पूरी कर चुके हैं, जो यूपीएससी की पात्रता शर्त है।

रश्मि शुक्ला का कार्यकाल: विवादों से भरा लेकिन प्रभावी

वर्तमान डीजीपी रश्मि शुक्ला (1987 बैच) का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। 2019 में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार आने के बाद उन्हें गैर-कार्यकारी सिविल डिफेंस भूमिका में हटा दिया गया था। बाद में उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया, जहां वे सीआरपीएफ की एडीजी और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की डीजी रहीं। 2022 में शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और एनसीपी नेता एकनाथ खड़से द्वारा फोन टैपिंग के आरोप में कई एफआईआर दर्ज हुईं, लेकिन 2022 में भाजपा-नीत महायुति सत्ता में लौटने के बाद ये मामले बंद हो गए। शुक्ला को फिर से डीजीपी बनाया गया, और उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र पुलिस ने साइबर क्राइम, माफिया और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सफलताएं हासिल कीं।

गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “रश्मि शुक्ला का कार्यकाल चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उनकी अनुभवी नेतृत्व क्षमता ने पुलिस महकमे को मजबूत किया। अब नई नियुक्ति राज्य की बदलती सुरक्षा चुनौतियों, जैसे शहरी अपराध और सीमा सुरक्षा, को ध्यान में रखकर की जाएगी।”

यूपीएससी की भूमिका और प्रक्रिया

यूपीएससी की समिति, जिसमें आयोग के अध्यक्ष के नेतृत्व में राज्य के मुख्य सचिव भी शामिल होते हैं, इन सात नामों की जांच करेगी। वरिष्ठता के अलावा, अधिकारियों के प्रदर्शन रिकॉर्ड, लंबित जांचें और सेवा अवधि जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के 2006 के फैसले के अनुसार, यह प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए ताकि राजनीतिक हस्तक्षेप न हो। महाराष्ट्र में डीजीपी पद पर नियुक्ति की यह प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से विवादों का शिकार रही है, लेकिन इस बार महायुति सरकार की मजबूत स्थिति से यह सुगम हो सकती है।

महाराष्ट्र पुलिस के लिए नई उम्मीदें

महाराष्ट्र, जो आर्थिक राजधानी मुंबई के साथ आतंकवाद, साइबर अपराध और संगठित माफिया की चुनौतियों से जूझ रहा है, के लिए नया डीजीपी महत्वपूर्ण साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सादानंद दाते जैसे अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति से एनआईए-स्तरीय जांच क्षमता राज्य स्तर पर मजबूत होगी। विपक्षी दलों ने भी इस प्रक्रिया पर नजर रखने की बात कही है, ताकि योग्यता पर आधारित चयन हो।

यह विकास महाराष्ट्र पुलिस के भविष्य को आकार देगा। जैसे ही यूपीएससी तीन नामों का पैनल जारी करेगी, राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो जाएगी। फिलहाल, सभी की नजरें इन सात दिग्गजों पर हैं, जो राज्य की सुरक्षा की कमान संभालने के लिए तैयार हैं।

saryusandhyanews
Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

Spread the love

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज