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इसरो की ‘बाहुबली’ रॉकेट से लॉन्च: भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 अंतरिक्ष में, नौसेना को मिलेगी मजबूत कनेक्टिविटी

श्रीहरिकोटा, 3 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। रविवार शाम 5:26 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च वाहन मार्क-3 (LVM3-M5) ‘बाहुबली’ रॉकेट ने भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 को सफलतापूर्वक जियो-सिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया। यह उपग्रह 4,410 किलोग्राम वजनी है, जो भारतीय मिट्टी से लॉन्च होने वाला अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है। यह मिशन न केवल इसरो की भारी लिफ्ट क्षमता को दर्शाता है, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूत करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्च के तुरंत बाद ट्वीट कर इसरो को बधाई दी। उन्होंने कहा, “हमारा अंतरिक्ष क्षेत्र हमें गर्व महसूस कराता रहता है! भारत के सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 के सफल लॉन्च पर इसरो को बधाई। हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की बदौलत हमारा अंतरिक्ष क्षेत्र उत्कृष्टता और नवाचार का पर्याय बन गया है।” केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इसे ‘बाहुबली’ की जीत बताते हुए पीएम मोदी की अगुवाई में लगातार सफल मिशनों की सराहना की।

‘बहुबली’ रॉकेट: इसरो की ताकत का प्रतीक

LVM3-M5, जिसे बाहुबली नाम से जाना जाता है, इसरो का सबसे शक्तिशाली लॉन्च वाहन है। इसकी ऊंचाई 43.5 मीटर और कुल वजन 642 टन है। लिफ्टऑफ के 16 मिनट बाद ही इसने CMS-03 को GTO में पहुंचा दिया। मिशन की शुरुआत S200 बूस्टर इंजनों के इग्निशन से हुई, जो 131.14 सेकंड बाद अलग हो गए। यह वाहन तीन चरणों वाला है, जिसमें क्रायोजेनिक इंजन की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

इसरो चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने मिशन कंट्रोल सेंटर से संबोधित करते हुए कहा, “LVM3 ने एक बार फिर भारत को गौरवान्वित किया है। यह ‘बाहुबली’ हमारी भारी पेलोड क्षमता का प्रमाण है।” उन्होंने बताया कि LVM3 की पेलोड क्षमता को चंद्रयान-3 मिशन के बाद 10% बढ़ाया गया था, जो अब 4,000 किलोग्राम तक GTO में ले जा सकता है। यह वाहन चंद्रयान-3 के सफल लॉन्च के बाद इसरो का पांचवां ऑपरेशनल फ्लाइट है।

CMS-03: नौसेना के लिए नया दौर, 15 साल की सेवा

CMS-03 एक मल्टी-बैंड संचार उपग्रह है, जो भारतीय नौसेना की GSAT-7 ‘रुक्मिणी’ श्रृंखला का प्रतिस्थापन है। यह उपग्रह भारत और उसके आसपास के विशाल समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षित संचार सेवाएं प्रदान करेगा। इसमें डिजिटल सेवाओं, सैटेलाइट इंटरनेट और समुद्री निगरानी के लिए विस्तारित बैंडविड्थ है, जो दूरस्थ और विवादित समुद्री क्षेत्रों में रीयल-टाइम कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।

इसरो के अनुसार, उपग्रह कम से कम 15 साल तक सेवा देगा और इसमें कई नई तकनीकें शामिल हैं, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ का उदाहरण हैं। लॉन्च के बाद उपग्रह के प्रोपल्शन बे डोर खुल गए और ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स ने इसे स्थिर किया। डॉ. नारायणन ने कहा, “यह मिशन नौसेना के स्पेस-बेस्ड नेटवर्क को मजबूत करेगा और समुद्री सुरक्षा को नई ऊंचाई देगा।”

स्वदेशी क्षमता का प्रमाण: विदेशी निर्भरता से मुक्ति

पहले इसरो भारी उपग्रहों (3,000 किलोग्राम से अधिक) को लॉन्च करने के लिए यूरोपीय एरियन-5 रॉकेट पर निर्भर था। 2018 में GSAT-11 (5,854 किलोग्राम) को फ्रेंच गुयाना से लॉन्च किया गया था। लेकिन CMS-03 के साथ भारत ने पहली बार 4,000 किलोग्राम से अधिक वजनी उपग्रह को पूरी तरह स्वदेशी रॉकेट से GTO में भेजा है। यह उपलब्धि भविष्य के मिशनों जैसे गगनयान और भारत अंतरिक्ष स्टेशन के लिए महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह लॉन्च इसरो की रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाएगा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, “भारत का ‘

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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