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14 लाख इनामी महिला नक्सली सुनीता का सरेंडर: नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता

बालाघाट, 3 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता): मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में नक्सल विरोधी अभियान को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। 14 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली सुनीता ने रविवार को पितकोना पुलिस चौकी अंतर्गत चिलोरा कैंप में आत्मसमर्पण कर दिया। यह घटना न केवल राज्य की नई नक्सल नीति की सफलता का प्रतीक है, बल्कि 1992 के बाद पहली बार किसी दूसरे राज्य की महिला नक्सली के मध्य प्रदेश में सरेंडर का दुर्लभ मामला भी है। सुनीता, जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति की सदस्य थी, तीन राज्यों में वांछित थी।

सुनीता का नक्सली सफर: 2022 से सक्रिय

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के ग्राम गोमवेटा की रहने वाली सुनीता ने वर्ष 2022 में नक्सली संगठन से जुड़ने का फैसला किया था। उसके बाद उसने पड़ोसी राज्य के मढ़ इलाके में छह महीने का कठोर नक्सली प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद सुनीता को रामदेर डालम की सुरक्षा में तैनात किया गया था। वह इंद्रावती और माड़ क्षेत्रों में सक्रिय थी, जहां से वह नक्सली गतिविधियों को अंजाम दे रही थी। पुलिस के अनुसार, सुनीता पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में कई संगीन अपराधों के आरोप थे, जिनमें हथियारों की तस्करी, हमले और संगठन के लिए भर्ती अभियान शामिल हैं। उसके सरेंडर के साथ ही पुलिस को बड़ी संख्या में हथियार और अन्य सामग्री बरामद हुई है।

सरेंडर के पीछे की वजह: दबाव और नीति का असर

पुलिस महानिरीक्षक संजय कुमार ने बताया कि सुनीता का सरेंडर मध्य प्रदेश सरकार की नई नक्सल नीति और राज्य में नक्सलियों पर बढ़ते दबाव का परिणाम है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चेतावनी का भी इसमें बड़ा हाथ है, जिसमें नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित किया गया था। सुनीता ने पूछताछ के दौरान बताया कि संगठन में लगातार हो रहे एनकाउंटर, संसाधनों की कमी और परिवार से दूरी ने उसे मुख्यधारा में लौटने का फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। यह बालाघाट जिले में पहली बार है जब किसी महिला नक्सली ने हथियार डालकर सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ाया है। जिले में नक्सलवाद से चार दशक से अधिक समय से जूझ रहे स्थानीय लोगों के लिए यह एक राहत की सांस है।

पुलिस की बड़ी कामयाबी: 10 महीनों में 1.46 करोड़ के इनामी नक्सली खत्म

पिछले 10 महीनों में मध्य प्रदेश पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियान में शानदार प्रदर्शन किया है। इस दौरान कुल 1.46 करोड़ रुपये के इनामी नक्सलियों का सफाया किया गया है, जिसमें कई प्रमुख कैडर शामिल हैं। सुनीता के सरेंडर के बाद पुलिस सूत्रों के अनुसार, रामदेर डालम की टीम के अन्य सदस्य भी आत्मसमर्पण की तैयारी में हैं। यह संगठन में बदलाव के संकेत देता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ट्वीट कर इस सफलता की सराहना की और कहा, “14 लाख रुपये की इनामी नक्सली सुनीता ने आज बालाघाट में आत्मसमर्पण कर दिया है। उससे बड़ी संख्या में हथियार व अन्य सामग्री बरामद की गई है। इस सफलता के लिए पुलिस बल प्रशंसा की पात्र है। अब जो कुछ नक्सली बचे हैं, वे आत्मसमर्पण करें या फिर पुलिस का सामना करने के लिए तैयार रहें।”

पुनर्वास की राह: मुख्यधारा में लौटने का नया अध्याय

सरेंडर के बाद सुनीता को राज्य सरकार की पुनर्वास योजना के तहत सभी लाभ प्रदान किए जाएंगे। इसमें वित्तीय सहायता, आजीविका प्रशिक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस ने अन्य नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुनीता जैसे सरेंडर न केवल संगठन को कमजोर करेंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं को गुमराह होने से बचाने में भी मददगार साबित होंगे।

यह घटना नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मध्य प्रदेश सरकार का दावा है कि 2026 तक राज्य को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित है, और सुनीता का सरेंडर इसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। आगे की पूछताछ से नक्सली नेटवर्क के कई राज खुलने की उम्मीद है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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