नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2025 – आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सौदा भारत में पहली बार पूर्ण रूप से नागरिक यात्री विमान के उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करेगा। एसजे-100 नामक इस ट्विन-इंजन, नैरो-बॉडी विमान को छोटी दूरी की उड़ानों के लिए डिजाइन किया गया है, जो मोदी सरकार की उड़ान योजना के तहत क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करेगा।
यह समझौता मॉस्को में 27 अक्टूबर को हस्ताक्षरित हुआ, जिसमें HAL के प्रतिनिधि प्रभात रंजन और UAC के ओलेग बोगोमोलोव ने दस्तखत किए। HAL के चेयरमैन डी.के. सुनील और UAC के डायरेक्टर जनरल वादिम बदेखा की उपस्थिति में यह MoU (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) फाइनल हुआ। HAL ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नागरिक विमानन क्षेत्र में एक बड़ा कदम बताया है, जो न केवल निजी क्षेत्र को मजबूत करेगा बल्कि हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा करेगा।
एसजे-100: छोटी दूरी का ‘गेम चेंजर’
रूस द्वारा विकसित एसजे-100 विमान 103 यात्रियों की क्षमता वाला है और इसकी उड़ान रेंज 3,530 किलोमीटर है। यह छोटे हवाई अड्डों पर उतरने-उठने के लिए आदर्श है, जो भारत जैसे विशाल देश में टियर-2 और टियर-3 शहरों को जोड़ने के लिए परफेक्ट साबित होगा। HAL के अनुसार, अगले दशक में भारत को 200 से अधिक क्षेत्रीय जेट और 350 अंतरराष्ट्रीय छोटी दूरी के विमानों की जरूरत होगी। यह विमान उड़ान योजना के तहत छोटे शहरों में हवाई यात्रा को सस्ता और सुलभ बनाएगा, जो 2016 में शुरू हुई थी।
रूस में पहले से ही 200 से अधिक एसजे-100 विमान निर्मित हो चुके हैं, जिनका उपयोग 16 से ज्यादा वाणिज्यिक एयरलाइंस कर रही हैं। भारत में इसका उत्पादन HAL को घरेलू ग्राहकों के लिए विशेष अधिकार देगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी। HAL ने कहा, “यह भारतीय विमानन उद्योग के इतिहास में एक नया अध्याय खोलेगा।”
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1988 के बाद पहला प्रयास
भारत में नागरिक विमान निर्माण का यह पहला पूर्ण प्रोजेक्ट है। आखिरी बार HAL ने 1961 से 1988 तक AVRO HS-748 विमान का उत्पादन किया था, जो मुख्य रूप से भारतीय वायुसेना के लिए था। उसके बाद से नागरिक विमानन क्षेत्र में कोई बड़ा स्वदेशी प्रयास नहीं हुआ। अब यह साझेदारी भारत को वैश्विक विमानन बाजार में मजबूत बनाएगी, खासकर जब चीन और अन्य देश इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
भारत-रूस संबंधों की मजबूती, लेकिन चुनौतियां भी
यह समझौता भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करता है, जो यूक्रेन युद्ध के बावजूद मजबूत बना हुआ है। भारत ने पश्चिमी देशों की एकतरफा प्रतिबंधों को खारिज करते हुए कहा है कि रूस के साथ संबंध अनुचित रूप से निशाना नहीं बनाए जाने चाहिए। हालांकि, अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर 50% तक टैरिफ लगाए हैं, जो इस सौदे को प्रभावित कर सकता है। UAC पर पश्चिमी प्रतिबंध लगे हैं, लेकिन भारत ने इसे ‘दोहरी मापदंड’ बताते हुए खरीद जारी रखी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी न केवल विमानन बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोलेगी। HAL, जो मुख्य रूप से सैन्य विमान बनाती है, अब नागरिक क्षेत्र में कदम रख रही है, जो उसके पोर्टफोलियो को विविध बनाएगा।
भविष्य की संभावनाएं: रनवे पर जल्द उतरेगा सपना
HAL का अनुमान है कि उत्पादन जल्द शुरू होगा, और पहला विमान रनवे पर उतरने की उम्मीद अगले कुछ वर्षों में है। यह प्रोजेक्ट निजी कंपनियों को भी जोड़ेगा, जैसे कि सप्लाई चेन और रखरखाव में। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत वैश्विक विमानन हब बने, और यह सौदा उसी दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
कुल मिलाकर, HAL-रूस साझेदारी भारत के हवाई यात्रा क्रांति का प्रतीक है। छोटे शहरों से दिल्ली-मुंबई तक सस्ती उड़ानें अब सपना नहीं, बल्कि हकीकत बनने वाली हैं। आत्मनिर्भर भारत का यह सफर अब आसमान छूने को तैयार है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




