मलेशिया में एशियाई शिखर सम्मेलन 2025: समावेशिता और स्थिरता का संकल्प, भारत की बढ़ती भूमिका
कुआलालंपुर, 27 अक्टूबर 2025 – मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में 26-27 अक्टूबर को आयोजित 47वें आसियान शिखर सम्मेलन ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एकता और विकास का नया संदेश दिया। ‘समावेशिता और स्थिरता’ के थीम के साथ आयोजित इस सम्मेलन में भारत ने अपनी रणनीतिक और सांस्कृतिक भूमिका को और मजबूत किया। पूर्वी तिमोर के आसियान में 11वें सदस्य के रूप में शामिल होने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर जोर ने इस सम्मेलन को ऐतिहासिक बना दिया। थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद के समाधान और आर्थिक एकीकरण की दिशा में कदम इस शिखर सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियां रही।
सम्मेलन का उद्घाटन: मलेशिया की प्रभावी अध्यक्षता
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की अगुवाई में शुरू हुआ यह शिखर सम्मेलन आसियान के 10 सदस्य देशों – ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम – के नेताओं का मंच बना। उद्घाटन समारोह में ब्राजील, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के नेता, साथ ही विश्व बैंक, आईएमएफ, आईएलओ और फीफा के प्रतिनिधि शामिल हुए। अनवर इब्राहिम ने कहा, “आसियान की एकजुटता आज की जटिल दुनिया में शांति और प्रगति का आधार है।”
सम्मेलन में आसियान कम्युनिटी विजन 2025 के कार्यान्वयन पर चर्चा हुई, जिसमें क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने पर फोकस रहा। मलेशिया ने आसियान-गल्फ सहयोग परिषद (जीसीसी) शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण को 27 मई 2025 को कुआलालंपुर में आयोजित करने की घोषणा की, जो क्षेत्रीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
भारत की सक्रिय भूमिका: वर्चुअल संबोधन और साझेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रभावशाली संबोधन दिया। उन्होंने कहा, “भारत और आसियान न केवल व्यापारिक साझेदार हैं, बल्कि सांस्कृतिक और सभ्यतागत रूप से जुड़े हैं।” मोदी ने भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को आसियान के साथ मजबूत करने का संकल्प दोहराया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन किया।
सम्मेलन में आसियान व्यापार इन गुड्स एग्रीमेंट (एटीआईजीए) के दूसरे प्रोटोकॉल का हस्तांतरण हुआ, जो भारत-आसियान आर्थिक संबंधों को गहरा करेगा। भारत ने पूर्वी तिमोर की आसियान सदस्यता पर बधाई दी और 2026 को ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष’ घोषित करने का प्रस्ताव रखा। यह कदम समुद्री सुरक्षा और नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 20वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां क्षेत्रीय स्थिरता पर विचार-विमर्श हुआ।
प्रमुख चर्चाएं: आर्थिक एकीकरण और जलवायु संरक्षण
सम्मेलन के दौरान आयोजित आसियान बिजनेस एंड इन्वेस्टमेंट समिट (एबीआईएस) 2025 में 1,000 वैश्विक नेता शामिल हुए। डिजिटल परिवर्तन, निवेश और अनुसंधान पर विशेष सत्रों में भारत ने तकनीकी विशेषज्ञता और डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में योगदान की पेशकश की। मलेशिया ने जलवायु परिवर्तन, विकास में असमानता और तकनीकी उन्नति पर साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया।
आसियान ने कम्युनिटी विजन 2025 के 10 वर्ष पूरे होने पर प्रगति की समीक्षा की, जिसमें राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर ध्यान रहा। थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद के शांतिपूर्ण समाधान ने क्षेत्रीय एकता को बल दिया, जबकि पूर्वी तिमोर की सदस्यता ने आसियान को और विस्तार दिया।
भारत के लिए नई संभावनाएं
47वें आसियान शिखर सम्मेलन ने मलेशिया को क्षेत्रीय कूटनीति का केंद्र बनाया। भारत की बढ़ती भागीदारी और मोदी का प्रेरणादायक संदेश इस बात का प्रमाण है कि भारत आसियान के साथ मिलकर क्षेत्रीय शांति और समृद्धि का आधार बन सकता है। पूर्वी तिमोर का प्रवेश और समुद्री सहयोग का प्रस्ताव भारत की रणनीति को मजबूत करेगा। यह सम्मेलन न केवल आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि जलवायु संकट और डिजिटल विभाजन जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी साझा समाधान की राह प्रशस्त करेगा। भारत के लिए यह एक अवसर है कि वह अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति को वैश्विक मंच पर और प्रभावी बनाए।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




