ऑपरेशन सिंदूर पर लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई का बड़ा बयान: ‘भारतीय नौसेना अरब सागर में उतर चुकी थी, पाकिस्तान के लिए विनाशकारी साबित हो सकता था’
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2025 – भारतीय सेना के महानिदेशक (सैन्य अभियान) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने ऑपरेशन सिंदूर पर खुलासा करते हुए कहा कि जब पाकिस्तान ने चार दिनों की सैन्य टकराव के बाद युद्धविराम की मांग की, तब भारतीय नौसेना अरब सागर में पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी। संयुक्त राष्ट्र ट्रूप कंट्रीब्यूटिंग कंट्रीज (UNTCC) चीफ्स कॉनक्लेव में बोलते हुए घई ने बताया कि नौसेना की यह तैनाती पाकिस्तान के लिए ‘विनाशकारी’ साबित हो सकती थी, यदि उन्होंने संघर्ष को और बढ़ाने की कोशिश की होती। यह बयान भारत की सैन्य तैयारियों की ताकत को दर्शाता है और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर नई रोशनी डालता है।
ऑपरेशन सिंदूर: पाहलगाम हमले का बदला और पाकिस्तान की नाकामी
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में पाहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें भारत ने पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। 7 मई से शुरू हुए इस अभियान में भारत ने आतंकवादियों को लक्षित किया, लेकिन पाकिस्तान ने तुरंत सीमा पार गोलीबारी शुरू कर दी। लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा, “हमने आतंकी ठिकानों पर हमला किया, लेकिन हमारा इरादा संघर्ष बढ़ाने का नहीं था। फिर भी, पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का सामना करने के लिए हम चार-पांच कदम आगे सोच चुके थे।” उन्होंने बताया कि भारत ने एलओसी के साथ-साथ गहराई में सटीक हमले किए, जिससे पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ।
घई ने खुलासा किया कि पाकिस्तान को एलओसी पर 100 से अधिक सैनिकों की हानि हुई, जो उनके 14 अगस्त के मरणोपरांत पुरस्कारों की सूची से साबित होता है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के ड्रोन हमले विफल रहे। हमारी हवाई रक्षा प्रणाली ने उन्हें मार गिराया।” इसके अलावा, भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी हवाई अड्डों पर सटीक हमले किए, जिसमें आठ एयर बेस, तीन हैंगर और चार रडार क्षतिग्रस्त हुए। पाकिस्तान ने जमीन पर ही एक सी-130 विमान, एक एडब्ल्यूएंडसी और चार-पांच फाइटर जेट खो दिए।
अरब सागर में नौसेना की तैनाती: ‘हम तैयार थे, पाकिस्तान को चेतावनी’
लेफ्टिनेंट जनरल घई का सबसे महत्वपूर्ण खुलासा भारतीय नौसेना की भूमिका पर था। उन्होंने कहा, “भारतीय नौसेना भी पूरी तरह से सक्रिय थी। यह तथ्य ज्यादा ज्ञात नहीं है, लेकिन जब डीजीएमओ ने बात की, तब नौसेना अरब सागर में उतर चुकी थी और पूरी तरह से तैयार थी।” यदि पाकिस्तान ने संघर्ष को आगे बढ़ाया होता, तो न केवल समुद्री मोर्चे से बल्कि अन्य आयामों से भी हमला होता, जो उनके लिए विनाशकारी साबित होता।
घई ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा, “यह सोचना नादान है कि हम तैयार नहीं थे। हमने युद्ध की संभावनाओं पर गहन विश्लेषण किया था।” उन्होंने पाहलगाम हमले के तीन आतंकवादियों का जिक्र किया, जो थकान और कुपोषण से ग्रस्त थे। “उन्हें ढूंढा गया और न्याय दिया गया,” घई ने कहा। यह बयान भारत की नई काउंटर-टेरर डॉक्ट्रिन को रेखांकित करता है, जिसमें सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक दबाव का संयोजन है।
ऑपरेशन की सफलता: आतंकवाद पर भारत की मजबूत नीति
ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर किया, बल्कि दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन भी किया। घई ने कहा कि पाकिस्तान की जल्दबाजी में युद्धविराम की मांग ने भारत के राजनीतिक और सैन्य उद्देश्यों की पुष्टि की। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी किसी भी उकसावे का जवाब और सख्त होगा। यह बयान संयुक्त राष्ट्र फोरम पर दिया गया, जो भारत की वैश्विक शांति भूमिका को मजबूत करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नौसेना की तैनाती ने क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित की। गृह मंत्री ने संसद में इसकी सराहना की, जबकि विपक्ष ने भी भारत की एकजुटता की तारीफ की। यह घटना आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का प्रतीक बनी हुई है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




