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नक्सलवाद से मुक्ति का संकल्प: अमित शाह का बयान – 2026 तक भारत नक्सल-मुक्त होगा, आत्मसमर्पण नीति से बढ़ रही उम्मीदें

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2025 – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि मार्च 2026 तक भारत पूरी तरह से नक्सल-मुक्त हो जाएगा। हाल ही में छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओइस्ट) के 50 नक्सलियों के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण को “नक्सलवाद उन्मूलन में ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताते हुए शाह ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार हर संभव सहायता करेगी। यह बयान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर अमित शाह का स्वागत: हथियारों का ढेर और नई शुरुआत

15 अक्टूबर 2025 को छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा में बीएसएफ की 40वीं बटालियन के कम्टेरा कैंप में एक ऐतिहासिक घटना घटी। दक्षिण क्षेत्रीय समिति (एसजेडसीएम) के वरिष्ठ नक्सली नेता राजमन मंडावी और राजू सलाम के नेतृत्व में 50 नक्सली, जिनमें 39 महिलाएं शामिल हैं, ने आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों ने 39 हथियार सौंपे, जिनमें 7 एके-47 राइफलें, 2 एसएलआर, 4 इंसास राइफलें, 1 इंसास एलएमजी और 1 स्टेन गन प्रमुख हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी सराहना करते हुए कहा, “यह नक्सलवाद को समाप्त करने में ऐतिहासिक मील का पत्थर है। मार्च 31, 2026 तक भारत नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त हो जाएगा।” अमित शाह ने आत्मसमर्पण करने वालों को मुख्यधारा में शामिल होने का आह्वान किया और कहा कि सरकार उनकी पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी लेगी।

यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ सरकार की नई आत्मसमर्पण नीति का परिणाम है, जो नक्सलियों को आकर्षित करने के लिए आर्थिक सहायता, रोजगार और सुरक्षा प्रदान करती है। शाह ने कहा कि ऐसे आत्मसमर्पण न केवल हिंसा को कम करते हैं, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की नींव रखते हैं।

2026 तक नक्सल-मुक्त भारत: सरकार की रणनीति और उपलब्धियां

अमित शाह ने कई मौकों पर दोहराया है कि नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम लड़ाई का समय आ गया है। अगस्त 2024 में रायपुर में आयोजित अंतरराज्यीय एंटी-नक्सल समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा था कि मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। राज्यसभा में बहस के दौरान भी उन्होंने जिम्मेदारी से कहा, “21 मार्च 2026 तक देश नक्सल समस्या से मुक्त हो जाएगा।”

सरकार की रणनीति में सख्त कार्रवाई, बेहतर खुफिया तंत्र और आत्मसमर्पण नीति का मिश्रण शामिल है। 2010 में जहां 107 जिलों से नक्सली घटनाएं दर्ज हो रही थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 42 रह गई है। 2019 से 2024 के बीच बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश नक्सल-मुक्त हो चुके हैं, जबकि महाराष्ट्र में केवल एक जिला (गढ़चिरोली) प्रभावित बचा है। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से 179 नक्सली मारे गए, 559 गिरफ्तार हुए और 540 ने आत्मसमर्पण किया है। 2024 में ही 880 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डाले हैं।

शाह ने नक्सलवाद को “लाल आतंक” बताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने अपील की, “आप अपनी 100% क्षमता आत्मसमर्पण नीति पर लगाएं और हथियार त्याग दें।” साथ ही, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में साक्षरता अभियान चलाने और विकास योजनाओं को पहुंचाने पर जोर दिया।

नक्सलवाद की जड़ें और चुनौतियां: विकास का रास्ता अपनाएं

अमित शाह ने नक्सलवाद को विकास की कमी से जोड़ने वालों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 60 करोड़ गरीबों के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन नक्सली ही इन्हें लोगों तक पहुंचने से रोकते हैं। नक्सल समर्थक न तो आदिवासियों का विकास चाहते हैं और न ही उनकी विचारधारा को दुनिया स्वीकार करती है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र को उदाहरण देते हुए शाह ने कहा कि कभी हिंसा का प्रतीक रहे बस्तर अब आशा और विकास का केंद्र बन चुका है। उन्होंने नक्सलियों से कहा, “हथियार छोड़ें, मुख्यधारा में आएं। सरकार आपका पुनर्वास सुनिश्चित करेगी, लेकिन हिंसा जारी रखने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।” दिसंबर 2024 में जगदलपुर में आयोजित ‘बस्तर ओलंपिक’ में भी उन्होंने यही संदेश दिया था।

नक्सल-मुक्त भारत की ओर: एक नई सुबह

अमित शाह का यह बयान न केवल आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर आत्मविश्वास जगाता है, बल्कि नक्सल प्रभावित राज्यों के लोगों को नई उम्मीद देता है। सरकार का दावा है कि 2024 में नक्सली हिंसा से नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत पहली बार चार दशकों में 100 से कम रही। ‘नक्सल मुक्त भारत’ अभियान के तहत सितंबर 2025 में आयोजित समापन सत्र में भी शाह ने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक हिंसक नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा।

यह लक्ष्य हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से कार्यरत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आत्मसमर्पणों की बढ़ती संख्या और सुरक्षा बलों की मजबूती से यह संभव है। हालांकि, नक्सलवाद के वैचारिक समर्थकों को पहचानने और उनसे निपटने की जरूरत पर शाह ने जोर दिया।

अंत में, गृह मंत्री ने कहा, “जब छत्तीसगढ़ नक्सल-मुक्त हो जाएगा, तो पूरा देश मुक्त हो जाएगा।” यह बयान नक्सलियों के लिए अंतिम चेतावनी और मुख्यधारा में लौटने का आह्वान दोनों है। 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का सपना साकार होने की ओर अग्रसर है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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