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अफगान-पाक सीमा पर हालात बेकाबू: पाकिस्तान को भारी झटका, उन्नत हथियारों के बावजूद तालिबान की कब्जे वाली चौकियों पर करारी हार

इस्लामाबाद/काबुल, 16 अक्टूबर 2025 – अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवादित डुरंड लाइन पर हालात फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। तालिबान सेनाओं ने पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर हमला बोल दिया, जिसमें पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ। अफगान दावों के मुताबिक, 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि पाकिस्तान ने इसे 23 सैनिकों की मौत बताकर खारिज किया। यह झड़पें पाकिस्तान के हालिया हवाई हमलों का बदला माने जा रहे हैं, जहां पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के ठिकानों को निशाना बनाया था। आश्चर्यजनक रूप से, पाकिस्तान के उन्नत हथियारों और हवाई शक्ति के बावजूद तालिबान लड़ाकों ने कई सीमा चौकियां कब्जा लीं, जो पाकिस्तानी सेना के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका है।

सीमा पर हालात: युद्ध का मैदान बने पहाड़ी इलाके

अफगान-पाक सीमा, जो 2,640 किलोमीटर लंबी डुरंड लाइन है, हमेशा से अस्थिर रही है। यह क्षेत्र खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और अफगान प्रांतों जैसे कुणार, नंगरहर, खोस्त और कंधार से घिरा है। हाल के दिनों में, तापमान गिरने के साथ ही हिंसा बढ़ गई है। स्थानीय निवासी भागने को मजबूर हो रहे हैं, व्यापारिक रास्ते बंद हैं, और मानवीय संकट गहरा रहा है। चमन-स्पिन बोल्दक क्रॉसिंग पर गोलीबारी से सैकड़ों अफगान शरणार्थी पाकिस्तान की ओर लौट रहे हैं, जबकि तुर्कमेन क्रॉसिंग पर भीड़ उमड़ पड़ी है।

पाकिस्तानी पक्ष से खबरें आ रही हैं कि तालिबान और टीटीपी के संयुक्त हमलों में सीमा चौकियां जैसे अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, डिर, चित्राल और बरमचा पर कब्जा हो गया। अफगान मीडिया के अनुसार, तालिबान ने पाकिस्तानी टैंकों और हथियारों को लूट लिया, जबकि पाकिस्तानी ड्रोन हमलों से अफगान गांवों में 15 से अधिक नागरिक मारे गए। सीमा पर हालात इतने खराब हैं कि संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यह व्यापक संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसमें हजारों निर्दोष जानें जा सकती हैं।

पाकिस्तान को करारी हार: उन्नत हथियारों का क्या हुआ?

पाकिस्तान की सेना दुनिया की सबसे आधुनिक सेनाओं में शुमार है। उसके पास जे-एफ-17 थंडर फाइटर जेट, ड्रोन, नाइट विजन डिवाइस और थर्मल ऑप्टिक्स जैसे उन्नत हथियार हैं, जो नाटो स्टैंडर्ड पर बने हैं। दिसंबर 2024 में पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में सटीक हवाई हमले किए, जिसमें 20-25 आतंकी मारे गए। लेकिन अक्टूबर 2025 के इन झड़पों में ये हथियार नाकाम साबित हुए। तालिबान के गुरीला युद्ध ने पाकिस्तानी चौकियों को घेर लिया, और पहाड़ी इलाकों में छिपे लड़ाकों ने आरपीजी और भारी तोपों से हमला किया।

अफगान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता एनायतुल्लाह ख्वाराजमी ने कहा, “हमारे लड़ाकों ने पाकिस्तानी हवाई हमलों का जवाब दिया और 25 से अधिक चौकियां कब्जा लीं।” पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने 200 से अधिक तालिबान लड़ाकों को मार गिराया, लेकिन वीडियो और स्थानीय रिपोर्ट्स में तालिबान के कब्जे वाले पाकिस्तानी पोस्ट दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीटीपी को अफगान तालिबान का समर्थन मिलने से पाकिस्तान की तकनीकी श्रेष्ठता बेअसर हो गई। 2025 में टीटीपी ने 600 से अधिक हमले किए, जिसमें 2,500 से ज्यादा लोग मारे गए।

संघर्ष की जड़ें: टीटीपी और पुरानी दुश्मनी

यह संघर्ष नया नहीं है। 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद पाकिस्तान ने उम्मीद की थी कि अफगान तालिबान टीटीपी पर लगाम लगाएंगे। लेकिन इसके उलट, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीटीपी को अफगान तालिबान से लॉजिस्टिकल और ऑपरेशनल सहायता मिल रही है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान में टीटीपी के ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं, जहां से सीमा पार हमले हो रहे हैं।

9 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तान ने काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में हवाई हमले किए, जिनका निशाना टीटीपी सरगना नूर वली मेहसूद था। इसके जवाब में तालिबान ने 11-12 अक्टूबर की रात को कई पाकिस्तानी पोस्ट पर हमला किया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उकसावे का आरोप लगाया। 15 अक्टूबर को सऊदी अरब और कतर की मध्यस्थता से 48 घंटे का युद्धविराम हुआ, लेकिन सीमाएं बंद हैं और तनाव बरकरार है।

भविष्य की आशंकाएं: व्यापक युद्ध का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि यह झड़पें पाकिस्तान के लिए आंतरिक सुरक्षा संकट को और गहरा कर रही हैं। खैबर पख्तूनख्वा में 2024-25 में 350 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद हो चुके हैं। तालिबान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने भारत दौरे पर पाकिस्तान को चेतावनी दी कि “कुछ समूह स्थिति खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।” पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा, “हर ईंट पर पत्थर से जवाब देंगे।”

अगर युद्धविराम टूटा, तो क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। भारत, चीन और रूस जैसे देशों ने संयम बरतने की अपील की है। फिलहाल, सीमा पर शांति बहाल करने के लिए बातचीत जारी है, लेकिन इतिहास गवाह है कि डुरंड लाइन पर शांति क्षणिक ही होती है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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