हरियाणा आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या मामले में एसआईटी का गठन: चंडीगढ़ पुलिस ने की जांच तेज
चंडीगढ़, 10 अक्टूबर 2025 – हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पुरण कुमार की संदिग्ध आत्महत्या मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। चंडीगढ़ पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया। एसआईटी का नेतृत्व आईजी रैंक के अधिकारी पुष्पेंद्र कुमार करेंगे। यह कदम अधिकारी की पत्नी अमनीत पी. कुमार की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के बाद उठाया गया है, जिसमें हरियाणा डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजरनिया पर उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है।
घटना का विवरण: एक वरिष्ठ अधिकारी का दर्दनाक अंत
वाई. पुरण कुमार (52 वर्ष), 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी, 7 अक्टूबर को अपने चंडीगढ़ स्थित निवास पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वे रोहतक के सुनेरिया स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर (पीटीसी) में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस के पद पर तैनात थे। उनके शव के पास से एक आठ पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें उन्होंने आठ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों पर पिछले पांच वर्षों से जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और अपमान का आरोप लगाया। नोट में विशेष रूप से डीजीपी कपूर और एसपी बिजरनिया का नाम लिया गया, जिन्हें उन्होंने अपनी मौत का मुख्य जिम्मेदार ठहराया।
कुमार की पत्नी अमनीत पी. कुमार, जो हरियाणा सरकार में आयुक्त और सचिव हैं, जापान से लौटकर चंडीगढ़ पहुंचीं। उन्होंने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि उनके पति को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा “व्यवस्थित उत्पीड़न” का शिकार बनाया गया। अमनीत ने एफआईआर में आरोपी अधिकारियों की गिरफ्तारी और परिवार को आजीवन सुरक्षा की मांग की। उन्होंने सुसाइड नोट में उल्लिखित शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि यह “संस्थागत हत्या” का मामला है।
एसआईटी का गठन: निष्पक्ष जांच का वादा
चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी सागर प्रीत हुड्डा के आदेश पर गठित एसआईटी में आईजी पुष्पेंद्र कुमार के अलावा एसएसपी (यूटी) कंवरदीप कौर, एसपी (सिटी) के.एम. प्रियंका, डीएसपी (ट्रैफिक) चरणजीत सिंह विर्क, एसडीपीओ (साउथ) गुरजीत कौर और इंस्पेक्टर जयवीर सिंह राणा (एसएचओ, पीएस-11) शामिल हैं। एसआईटी को एफआईआर नंबर 156/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) के तहत जांच करने का निर्देश दिया गया है।
पुलिस ने कहा कि एसआईटी सबूत संग्रह, गवाहों के बयान, विशेषज्ञ राय और कानूनी सलाह के साथ समयबद्ध जांच करेगी। अमनीत ने एफआईआर की प्रति पर आपत्ति जताई, जिसमें आरोपी अधिकारियों के नाम स्पष्ट रूप से नहीं थे। उन्होंने एसएसपी चंडीगढ़ को पत्र लिखकर एफआईआर में संशोधन की मांग की, जिसमें धारा 3(2)(v) को जोड़ने की बात कही।
हरियाणा सरकार की प्रतिक्रिया: डीजीपी पर कार्रवाई की अटकलें
हरियाणा सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। स्रोतों के अनुसार, डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजरनिया को लंबी छुट्टी पर भेजने पर विचार किया जा रहा है। अंतरिम डीजीपी के लिए 1993 बैच के अलोक मित्तल (हरियाणा विजिलेंस प्रमुख) को प्राथमिकता दी जा रही है।
एससी/एसटी समुदाय के प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय में जाकर निष्पक्ष जांच की मांग की। अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने इसे “जातिवादी चुप्पी” बताते हुए विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। विपक्षी दल भी भाजपा सरकार पर दबाव बना रहे हैं, स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
जातिगत भेदभाव का सवाल: पुलिस महकबे में सड़ांध
यह मामला भारतीय पुलिस सेवा में जातिगत भेदभाव की गहरी समस्या को उजागर करता है। पुरण कुमार, जो एससी समुदाय से थे, अक्सर अधिकारियों के अधिकारों और वरिष्ठता से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाते थे। उनके सुसाइड नोट में पिछले पांच वर्षों की घटनाओं का जिक्र है, जो मानसिक यातना का रूप ले चुकी थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना पुलिस सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




