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खांसी की सिरप मामले में जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका: राज्य तंत्र पर भरोसा जताया

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2025 – सुप्रीम कोर्ट ने खांसी की सिरप से बच्चों की मौत के मामले में सीबीआई जांच और दवा सुरक्षा तंत्र की समीक्षा की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर इस याचिका को सुनवाई के दौरान ही रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि राज्य स्तर के मौजूदा तंत्र पर्याप्त हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी याचिका का विरोध किया, जिसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता से उनके द्वारा दायर अन्य पीआईएल की संख्या पूछी और मामला खारिज कर दिया।

खांसी की सिरप कांड: मौतों का सिलसिला

यह मामला मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से जुड़ा है, जहां कोल्डरिफ खांसी की सिरप के सेवन से कम से कम 21 बच्चों की मौत हो चुकी है। सभी बच्चे पांच वर्ष से कम उम्र के थे। सिरप तमिलनाडु की स्रेसन फार्मा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित था, जिसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) नामक जहरीला पदार्थ पाया गया, जो औद्योगिक सॉल्वेंट है और दवाओं में प्रतिबंधित है। इस सिरप को सर्दी-खांसी के इलाज के लिए बच्चों को दिया गया था, जिससे उनमें तीव्र किडनी फेलियर हो गया।

मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और महाराष्ट्र में भी संदिग्ध मामले सामने आए हैं। मध्य प्रदेश पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है, और चेन्नई पुलिस की मदद से सिरप के निर्माता जी. रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक सरकारी डॉक्टर, जिसने सिरप लिखा था, को भी गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार ने डॉक्टर को निलंबित कर दिया। मौतों की संख्या अब 22 तक पहुंच चुकी है।

यह पहला मामला नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पहले भी भारत निर्मित सिरपों को गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में बच्चों की मौतों से जोड़ा था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि राज्य सरकारें एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रही हैं, जबकि जांच में देरी हो रही है।

याचिका की मांगें: सीबीआई जांच से लेकर राष्ट्रीय समीक्षा तक

वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर पीआईएल में कई मांगें की गईं:

  • एक रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में सीबीआई द्वारा स्वतंत्र जांच।
  • सभी राज्यों में लंबित एफआईआर को सीबीआई को सौंपना।
  • राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति का गठन, जो सिरप निर्माण, परीक्षण और वितरण की प्रक्रिया की जांच करे।
  • कोल्डरिफ सिरप के सभी बैचों का तत्काल रिकॉल और जब्ती।
  • स्रेसन फार्मा का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस निलंबित करना।
  • बाजार में उपलब्ध सभी सिरप-आधारित फॉर्मूलेशन की अनिवार्य जांच।

याचिकाकर्ता ने कहा कि यह घटना दवा उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण की कमी को उजागर करती है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को प्रभावित कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: याचिकाकर्ता पर सवाल, राज्य तंत्र पर भरोसा

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि वे किसी राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे, लेकिन “राज्यों पर भरोसा करना चाहिए।” उन्होंने याचिकाकर्ता से पूछा कि उन्होंने कितनी पीआईएल दायर की हैं। तिवारी ने जवाब दिया, “शायद आठ से दस।” इस पर मुख्य न्यायाधीश गवाई ने याचिका को तुरंत खारिज कर दिया।

पीठ ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा राज्य तंत्र पर्याप्त हैं, और केंद्रीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं। कोर्ट ने दवा नियामक निकायों जैसे सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) पर भरोसा जताया। इससे पहले कोर्ट ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की सहमति दी थी, लेकिन अंत में इसे रद्द कर दिया।

दवा सुरक्षा पर सवाल: पुरानी समस्या, नई चुनौतियां

भारत का फार्मास्यूटिकल उद्योग दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा है, लेकिन गुणवत्ता नियंत्रण की समस्याएं बार-बार सामने आ रही हैं। डीईजी और ईथाइलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले पदार्थों की मौजूदगी से पहले भी कई मौतें हुई हैं। सीडीएससीओ ने सभी खांसी सिरप निर्माताओं की सूची मांगी है और संयुक्त ऑडिट शुरू किया है।

विपक्षी दल और विशेषज्ञों ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर दवा सुरक्षा तंत्र मजबूत करने की मांग की है। मध्य प्रदेश सरकार ने जांच तेज करने का वादा किया है, लेकिन परिवारों का गुस्सा बढ़ रहा है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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