नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2025 – भारतीय सेना ने एक और मील का पत्थर हासिल किया है। मेजर राजप्रसाद आर.एस. द्वारा विकसित ‘विद्युत रक्षक’ नामक एकीकृत जेनरेटर मॉनिटरिंग, प्रोटेक्शन और कंट्रोल सिस्टम को केंद्र सरकार द्वारा पेटेंट प्रदान किया गया है। यह आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) आधारित स्वदेशी तकनीक सेना की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूत बनाएगी। पेटेंट 13 जून 2023 से 20 वर्षों के लिए वैध है, जो पेटेंट एक्ट 1970 के तहत जारी किया गया।
‘विद्युत रक्षक’ का जन्म और विकास
‘विद्युत रक्षक’ को आर्मी डिजाइन ब्यूरो (एडीबी) के तहत विकसित किया गया है। मेजर राजप्रसाद आर.एस., जो सेना के एक अनुभवी अधिकारी हैं, ने इस सिस्टम को डिजाइन किया। यह सिस्टम विभिन्न प्रकार, ब्रांड, रेटिंग या पुराने मॉडल के जेनरेटरों की एकीकृत निगरानी, सुरक्षा और नियंत्रण को सक्षम बनाता है। आईओटी तकनीक के माध्यम से यह डिवाइस इंटरनेट से जुड़कर डेटा का आदान-प्रदान करता है, जिससे फॉल्ट प्रेडिक्शन, ऑटोमेटेड ऑपरेशन और ऊर्जा दक्षता में सुधार होता है।
यह नवाचार जून 2024 में आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया था, जब सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इसका उद्घाटन किया। ‘एक्सरसाइज भारत शक्ति’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका प्रदर्शन देखा। दिसंबर 2023 में इंडियन आर्मी आइडियाज एंड इनोवेशन कॉम्पिटिशन के दौरान इसकी तकनीक हस्तांतरण (टीओटी) एक प्रोडक्शन एजेंसी को सौंपी गई, जो इसे पहला ऐसा उदाहरण बनाता है।
तकनीकी विशेषताएं: कैसे काम करता है ‘विद्युत रक्षक’?
‘विद्युत रक्षक’ एक स्मार्ट सिस्टम है जो सेना के दूरस्थ और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को मजबूत बनाता है। इसके प्रमुख फीचर्स में शामिल हैं:
- एकीकृत मॉनिटरिंग: कई जेनरेटरों को एक साथ ट्रैक करता है, चाहे वे किसी भी प्रकार के हों।
- फॉल्ट प्रेडिक्शन: मशीन लर्निंग के जरिए खराबी की पहले से भविष्यवाणी करता है।
- ऑटोमेटेड कंट्रोल: मैनुअल प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाता है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है।
- आईओटी इंटीग्रेशन: क्लाउड से जुड़कर रीयल-टाइम डेटा प्रदान करता है, जो सेना के ऑपरेशनल कैपेबिलिटी को बढ़ाता है।
सेना के एडीजी पीआई ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “भारतीय सेना ने ‘विद्युत रक्षक’ के लिए पेटेंट हासिल कर एक और मील का पत्थर हासिल किया। यह आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करता है।” यह सिस्टम पहले से ही सेना में व्यापक रूप से उपयोग हो रहा है, खासकर हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में, जहां बिजली की विश्वसनीयता चुनौतीपूर्ण होती है।
मेजर राजप्रसाद का योगदान: नवाचारों की श्रृंखला
मेजर राजप्रसाद आर.एस. सेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में से एक हैं जो तकनीकी नवाचारों से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं। उनके नाम पर पहले भी कई पेटेंट हैं। उदाहरण के लिए, ‘पोर्टेबल मल्टी-टारगेट डेटोनेशन डिवाइस’ को हाल ही में पेटेंट मिला, जो सेना में शामिल हो चुका है। फरवरी 2025 में एरो 2025 प्रदर्शनी में उनके तीन नवाचारों – ‘विद्युत रक्षक’, ‘अग्निस्ट्र’ (मल्टी टारगेट पोर्टेबल रिमोट डेटोनेशन सिस्टम) और ‘एक्सप्लोडर’ (कामिकेज और आईईडी डिस्पोजल आरओवी) – को लॉन्च किया गया।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा था, “टेक्नोलॉजी एब्जॉर्प्शन ईयर के दौरान ‘विद्युत रक्षक’ की सफलता इनोवेशन से इंडक्शन तक का उदाहरण स्थापित करती है।” मेजर राजप्रसाद का यह योगदान सेना के ‘ट्रांसफॉर्मेटिव चेंज’ के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्व
यह पेटेंट न केवल सेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ऊर्जा दक्षता बढ़ाने से सैन्य ऑपरेशनों की लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘विद्युत रक्षक’ जैसी तकनीकें सिविल सेक्टर में भी उपयोगी साबित होंगी, जैसे ग्रामीण विद्युतीकरण और औद्योगिक मॉनिटरिंग में।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




